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प्रियंका गांधी ने हल्द्वानी विवाद पर पीएम मोदी से कार्रवाई की मांग की

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने हल्द्वानी में हुए कथित 'शुद्धिकरण' विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि पीएम संविधान का सम्मान करते हैं, तो FIR दर्ज करानी चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि इस घटना ने दलित समुदाय के प्रति अपमानजनक व्यवहार को उजागर किया है। राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर आवाज उठाई है। बीजेपी ने इसे राजनीतिक विवाद करार दिया है। इस विवाद ने अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना लिया है।
 

प्रियंका गांधी का पीएम मोदी को पत्र


कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद उत्पन्न हुए कथित 'शुद्धिकरण' विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कार्रवाई की अपील की है। प्रियंका ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री संविधान का सम्मान करते हैं, तो उन्हें इस मामले में FIR दर्ज करानी चाहिए और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत उचित कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।


कांग्रेस का आरोप

कांग्रेस का कहना है कि मल्लिकार्जुन खरगे ने 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में एक रैली को संबोधित किया था। पार्टी का आरोप है कि इस कार्यक्रम के बाद वहां कथित तौर पर 'शुद्धिकरण' की रस्म निभाई गई। कांग्रेस ने इसे दलित समुदाय और खरगे के प्रति अपमानजनक बताया है।


प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि यह घटना संविधान और SC/ST कानून का उल्लंघन है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।


संविधान का सम्मान करने की अपील

प्रियंका ने प्रधानमंत्री मोदी को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि यदि वह संविधान का सम्मान करते हैं, तो उन्हें उत्तराखंड में हुई इस घटना के खिलाफ FIR दर्ज करानी चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि घटना के लगभग 20 दिन बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई।


कांग्रेस का कहना है कि यह केवल राजनीतिक विवाद नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समानता और दलित सम्मान से जुड़ा मामला है। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया है कि ऐसी घटनाएं समाज में भेदभाव की मानसिकता को बढ़ावा देती हैं।


राहुल गांधी की भी मांग

प्रियंका गांधी से पहले, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी इस विवाद पर प्रधानमंत्री मोदी से FIR दर्ज कराने की मांग की थी। उन्होंने कथित 'शुद्धिकरण' को छुआछूत की मानसिकता से जोड़ा और SC/ST अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की।


राहुल ने यह भी सवाल किया था कि घटना के बाद अब तक FIR क्यों नहीं दर्ज की गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि दलित समुदाय के सम्मान और समानता से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए।


बीजेपी का जवाब

बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक विवाद बताया है। पार्टी ने राहुल गांधी के आरोपों को समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश करार दिया और कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही है।


इस विवाद ने कांग्रेस और बीजेपी के बीच बयानबाजी को और तेज कर दिया है। कांग्रेस इसे जातिगत भेदभाव और सामाजिक सम्मान से जोड़ रही है, जबकि बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों पर सवाल उठाए हैं।


क्यों जरूरी है SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई?

कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ जाति के आधार पर अपमान या भेदभाव से जुड़ा अपराध बनता है, तो संबंधित कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। प्रियंका गांधी ने इसी आधार पर प्रधानमंत्री से दोषियों के खिलाफ FIR और SC/ST अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है।


हालांकि, किसी घटना में कानून की कौन-सी धाराएं लागू होंगी और FIR के बाद आगे क्या कार्रवाई होगी, यह जांच और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है। इसलिए मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।


राजनीतिक बयानबाजी का बढ़ता ताप

हल्द्वानी का यह विवाद अब उत्तराखंड की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। कांग्रेस के कई नेताओं ने इसे सामाजिक समानता और दलित सम्मान का मुद्दा बताया है। राहुल गांधी के बाद प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया ने इस मामले को लेकर कांग्रेस के हमले को और तेज कर दिया है।


प्रियंका गांधी की मांग के बाद अब यह देखना है कि केंद्र और उत्तराखंड सरकार इस मामले में कोई आधिकारिक कानूनी कार्रवाई करती है या नहीं। फिलहाल कांग्रेस लगातार FIR और SC/ST कानून के तहत कार्रवाई की मांग कर रही है, जबकि बीजेपी इन आरोपों को राजनीतिक विवाद बता रही है।