प्रसिद्ध साहित्यकार कैलाश चंद्र पंत का निधन, हिंदी साहित्य में योगदान अविस्मरणीय
कैलाश चंद्र पंत का निधन
प्रसिद्ध लेखक और पद्मश्री पुरस्कार विजेता कैलाश चंद्र पंत का शुक्रवार को 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके परिवार ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की। बताया गया कि पंत पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे थे और शुक्रवार सुबह हृदयगति रुकने के कारण उनका निधन हुआ।
परिवार और शोक संदेश
पंत के बड़े भाई चंद्रशेखर पंत ने एक संदेश में कहा, "दुख के साथ सूचित करना है कि मेरे छोटे भाई और प्रीति, निवेदिता तथा अदिति के पिता, हिंदी भवन भोपाल के पूर्व मंत्री-संचालक कैलाश चंद्र पंत का प्रभु से मिलन हो गया है।" उन्होंने यह भी बताया कि कैलाश चंद्र पंत का अंतिम संस्कार शनिवार को भदभदा विश्राम घाट पर किया जाएगा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया और श्रद्धांजलि अर्पित की।
जीवन और करियर
कैलाश चंद्र पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को इंदौर के महू में हुआ था। उनका परिवार रोजगार के कारण उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के खंतोली गांव से मध्यप्रदेश में बस गया था। पंत ने इंदौर में 'यूनियन थियोलाजिकल सेमिनरी' में व्याख्याता के रूप में कार्य किया और बाद में भोपाल में पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य बने।
साहित्यिक योगदान
पंत ने 'शिक्षा प्रदीप', 'जनधर्म', और 'दूरगामी आह्वान' जैसी साहित्यिक पत्रिकाओं का संपादन किया। हिंदी भवन, भोपाल में संचालक रहते हुए उन्होंने भारत कृषक समाज, राष्ट्रप्रचार समिति, और मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति जैसी कई संस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'कौन किसका आदमी', 'धुंध के आर-पार', 'शब्द का विचार-पथ', और 'शैलेश मटियानी: सृजन यात्रा' शामिल हैं।
सम्मान और पुरस्कार
इस वर्ष उन्हें हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा, उन्हें साहित्य भूषण, निराला साहित्य सम्मान, साहित्य शिरोमणि, और संस्कृति गौरव जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी मिल चुके हैं।