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प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ में 'स्वाभिमान पर्व' में भाग लिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर में 'स्वाभिमान पर्व' में भाग लिया, जहां उन्होंने ऐतिहासिक भाषण दिया। इस अवसर पर उन्होंने सोमनाथ के गौरवमयी इतिहास और पुनर्निर्माण की यात्रा पर प्रकाश डाला। मोदी ने तुष्टीकरण की राजनीति पर भी कड़ा प्रहार किया। जानें इस भव्य समारोह की विशेषताएँ और प्रधानमंत्री के विचार।
 

सोमनाथ मंदिर में ऐतिहासिक समारोह

रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर में आयोजित भव्य 'स्वाभिमान पर्व' में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने भगवान सोमनाथ की पूजा की और एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। यह आयोजन महमूद गजनवी द्वारा मंदिर पर किए गए पहले हमले के 1,000 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में मनाया गया।


सोमनाथ का गौरवमयी इतिहास

अपने भाषण में, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास केवल विनाश का नहीं है, बल्कि यह हर बार गिरकर फिर से खड़े होने और विजय का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज सोमनाथ के मंदिर पर लहराता ध्वज पूरी दुनिया को भारत की शक्ति का परिचय दे रहा है।


एक हजार साल का संघर्ष

1,000 साल का संघर्ष


प्रधानमंत्री ने भावुक होकर कहा कि एक हजार साल पहले हमारे पूर्वजों ने अपनी आस्था और महादेव के प्रति अपनी जान की बाजी लगाई थी। उन्होंने कहा, 'जब गजनी से लेकर औरंगजेब तक कई आक्रमणकारी सोमनाथ को नष्ट करने में लगे थे, तो उन्हें लगा कि उनकी तलवारें सनातन को पराजित कर देंगी। लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि सोमनाथ का अर्थ ही 'अमृत' है, जिसे मिटाया नहीं जा सकता।'


उन्होंने यह भी याद दिलाया कि आज हमले के 1,000 साल पूरे हो रहे हैं, साथ ही मंदिर के आधुनिक पुनर्निर्माण के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं।


तुष्टीकरण की राजनीति पर कड़ा प्रहार

तुष्टीकरण की राजनीति पर कड़ा प्रहार


अपने संबोधन में, पीएम मोदी ने पूर्ववर्ती सरकारों और गुलामी की मानसिकता रखने वालों पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद भी कुछ लोगों ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण को रोकने का प्रयास किया। जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया, तो उन्हें भी कई बाधाओं का सामना करना पड़ा।


डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जिक्र करते हुए, पीएम ने बताया कि 1951 में जब तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद मंदिर आए थे, तब भी उन पर आपत्तियां उठाई गई थीं। उन्होंने कहा कि तुष्टीकरण के ठेकेदारों ने हमेशा भारत की सांस्कृतिक विरासत को दबाने की कोशिश की।


स्वाभिमान पर्व का अद्भुत नजारा

अद्भुत रहा 'स्वाभिमान पर्व' का नजारा


इस उत्सव की भव्यता का वर्णन करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि 1,000 ड्रोन द्वारा प्रदर्शित सोमनाथ की गाथा, 108 घोड़ों की शौर्य यात्रा और 72 घंटों तक लगातार चलता मंत्रोच्चार मंत्रमुग्ध कर देने वाला था। उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल अतीत की याद नहीं है, बल्कि भारत के अस्तित्व और गर्व का उत्सव है।