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प्रधानमंत्री मोदी ने प्रगति मंच की 50वीं बैठक में विकास की समीक्षा की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए साल के जश्न के बीच प्रगति मंच की 50वीं बैठक में पिछले एक दशक की उपलब्धियों की समीक्षा की। उन्होंने शासन की नई परिभाषा प्रस्तुत की, जिसमें समय पर निर्णय और जवाबदेही का महत्व बताया गया। ‘पीएम श्री योजना’ की समीक्षा करते हुए, उन्होंने शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। आंकड़ों के अनुसार, 2014 से अब तक 377 परियोजनाओं की समीक्षा की गई है, जिनमें से 94 प्रतिशत समस्याओं का समाधान हो चुका है। यह बैठक सहकारी संघवाद का एक जीवंत उदाहरण है, जो भारत के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
 

नए साल के जश्न के बीच प्रगति की समीक्षा

जब देश नए साल का स्वागत कर रहा था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की प्रगति की गहन समीक्षा में व्यस्त थे। बुधवार को उन्होंने ‘प्रगति’ (Pro-Active Governance and Timely Implementation) मंच की 50वीं बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें पिछले एक दशक की उपलब्धियों का विश्लेषण किया गया और भविष्य के लिए शासन और विकास का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया गया।


प्रगति मंच की उपलब्धियाँ

प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले दस वर्षों में ‘प्रगति’ मंच के माध्यम से 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया गया है। यह मंच केवल एक समीक्षा प्रणाली नहीं है, बल्कि देश की शासन संस्कृति में आए ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रतीक बन चुका है। बैठक में सड़क, रेलवे, बिजली, जल संसाधन और कोयला क्षेत्रों की पांच प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा की गई, जिनमें 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश शामिल है।


शासन की नई परिभाषा

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि शासन का अर्थ अब केवल फाइलों को आगे बढ़ाना नहीं है, बल्कि समय पर निर्णय लेना, सटीक समन्वय करना और जवाबदेही तय करना है। उन्होंने कहा कि जब निर्णय समय पर होते हैं और जिम्मेदारी तय होती है, तो इसका सीधा लाभ नागरिकों को मिलता है।


शिक्षा प्रणाली पर ध्यान

‘पीएम श्री योजना’ की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यह योजना केवल इमारतें बनाने तक सीमित न रहे। उन्होंने परिणामों पर जोर दिया, जिसमें ऐसी शिक्षा प्रणाली होनी चाहिए जो समग्र हो और भविष्य के लिए तैयार हो। सभी मुख्य सचिवों को निर्देश दिया गया कि वे स्वयं निगरानी करें और स्कूलों की वास्तविक स्थिति का आकलन करें।


प्रगति का मूल विचार

प्रधानमंत्री ने ‘प्रगति’ के मूल विचार को याद करते हुए बताया कि इसकी प्रेरणा गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए शुरू किए गए ‘स्वागत’ तंत्र से मिली थी। इस तंत्र ने तकनीक के माध्यम से जन-शिकायतों का समयबद्ध समाधान किया। इसी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित कर ‘प्रगति’ मंच के रूप में लागू किया गया।


परियोजनाओं की सफलता

आंकड़े इस परिवर्तन की गवाही देते हैं। 2014 से अब तक ‘प्रगति’ के तहत 377 परियोजनाओं की समीक्षा की गई, जिनमें से 2,958 मुद्दों का समाधान हो चुका है। इसके चलते कई वर्षों से अटकी परियोजनाएं अब आगे बढ़ रही हैं। असम का बोगीबील रेल-सड़क पुल, जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक, और नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा जैसे प्रोजेक्ट्स इसके ठोस उदाहरण हैं।


सहकारी संघवाद का मॉडल

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘प्रगति’ सहकारी संघवाद का एक जीवंत मॉडल है, जहां केंद्र, राज्य, मंत्रालय और विभाग एक ही मंच पर समस्या का समाधान खोजते हैं। अब तक लगभग 500 केंद्रीय सचिव और राज्य के मुख्य सचिव इसमें भाग ले चुके हैं। अगले चरण के लिए प्रधानमंत्री ने अपना मंत्र दोहराते हुए कहा, “Reform to simplify, Perform to deliver, Transform to impact”, इसे ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य से जोड़ा।


जिम्मेदार नेतृत्व का उदाहरण

जब देश नए साल की रात में उलटी गिनती कर रहा था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। यह दिखाता है कि मोदी की राजनीति उत्सवों की नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व की राजनीति बन चुकी है।


निरंतरता और अनुशासन

आज जब दुनिया भारत को उभरती शक्ति के रूप में देख रही है, तब इसके पीछे यह निरंतर, अनुशासित और परिणाम-उन्मुख शासन है। जश्न मनाना बुरा नहीं, लेकिन जश्न के बीच भी काम करना, यह हर किसी के बस की बात नहीं। यही नया भारत है और यही ‘प्रगति’ है।