प्रधानमंत्री मोदी ने कोलकाता में थंथनिया कालीबाड़ी मंदिर का दौरा किया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान थंथनिया कालीबाड़ी मंदिर का दौरा किया। इस 300 साल पुराने मंदिर में उन्होंने मां काली की पूजा की और आशीर्वाद लिया। मंदिर का रामकृष्ण परमहंस से गहरा संबंध है और यहां मांसाहारी प्रसाद चढ़ाने की अनूठी परंपरा भी है। जानें इस ऐतिहासिक स्थल के बारे में और इसके महत्व के बारे में।
Apr 26, 2026, 19:21 IST
प्रधानमंत्री का मंदिर दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान उत्तरी कोलकाता में अपने रोडशो की शुरुआत से पहले थंथनिया कालीबाड़ी मंदिर का दौरा किया। यहां उन्होंने मां काली की विशेष पूजा की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। यह मंदिर अपनी प्राचीनता और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।
300 साल पुराना ऐतिहासिक मंदिर
थंथनिया कालीबाड़ी कोलकाता के सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित मंदिरों में से एक है। इसकी स्थापना 1703 में हुई थी, और इसका इतिहास शहर के औपचारिक विकास से पहले का माना जाता है। यहां मां काली को 'मां सिद्धेश्वरी' के रूप में पूजा जाता है, और स्थानीय लोग इसे 'जागृत' देवी मानते हैं।
रामकृष्ण परमहंस का संबंध
इस मंदिर का महान संत रामकृष्ण परमहंस से गहरा संबंध है। कहा जाता है कि वे अक्सर यहां आते थे और मां सिद्धेश्वरी के लिए भक्ति गीत गाते थे। मंदिर की दीवारों पर उनकी कही गई 'वाणी' उकेरी गई है, जिसमें लिखा है, 'शंकरेर हृदोय माझे, काली बिराजे' (मां काली शंकर के हृदय में निवास करती हैं)।
प्रसाद की अनूठी परंपरा
यह मंदिर भारत के उन कुछ मंदिरों में से एक है जहां देवी को 'मांसाहारी प्रसाद' चढ़ाया जाता है। इस अनूठी परंपरा की शुरुआत रामकृष्ण परमहंस ने की थी। उन्होंने ब्रह्मानंद केशव चंद्र सेन के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करते हुए मंदिर में 'डाब-चिंगड़ी' (नारियल और झींगा) का भोग चढ़ाया था। इसके बाद से यह परंपरा जारी है। कहा जाता है कि जब रामकृष्णदेव बीमार पड़े थे, तब उनके अनुयायियों ने भी उनके स्वास्थ्य के लिए यहां मां सिद्धेश्वरी को मांसाहारी भोग चढ़ाया था।