प्रधानमंत्री मोदी के कैबिनेट में संभावित फेरबदल की अटकलें तेज़
कैबिनेट में बदलाव की संभावनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में कैबिनेट में बदलाव या महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णयों का अनुमान लगाना कठिन है, क्योंकि वे अपनी योजनाओं को गुप्त रखते हैं और सही समय पर ही उनका खुलासा करते हैं। हाल ही में दो घटनाओं ने कैबिनेट में संभावित फेरबदल के बारे में अटकलों को फिर से जन्म दिया है। पहली घटना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा इंटेलिजेंस ब्यूरो के निवर्तमान निदेशक तपन डेका के सम्मान में आयोजित डिनर है। शाह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में डेका की सराहना की और इस अवसर की तस्वीरें साझा कीं।
इस कदम ने डेका के भविष्य को लेकर अटकलें बढ़ा दी हैं, यह संभावना जताई जा रही है कि उन्हें रिटायरमेंट के बाद कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है, संभवतः जम्मू-कश्मीर में, जहाँ मनोज सिन्हा वर्तमान में लेफ्टिनेंट गवर्नर हैं। इससे यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि सिन्हा को केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है।
दूसरी महत्वपूर्ण घटना केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के नेतृत्व में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में अचानक प्रशासनिक बदलाव था। यादव के चार प्रमुख सहयोगियों को हटाने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल मच गई है, क्योंकि ये लोग बीजेपी के महत्वपूर्ण रणनीतिकार माने जाते हैं।
पूर्व पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश के नेतृत्व में कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए शासन व्यवस्था के कमजोर होने का आरोप लगाया और यादव के मंत्रालय में बड़े घोटाले का जिक्र किया। यह घटना किसी बड़े बदलाव की ओर इशारा कर सकती है या यह केवल एक प्रशासनिक कदम हो सकता है, यह तो भविष्य में ही स्पष्ट होगा। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि संसद के मॉनसून सत्र से पहले कैबिनेट में फेरबदल की संभावना कम है, क्योंकि सरकार का ध्यान कानून बनाने पर है।
प्रधानमंत्री का कार्यक्रम भी अत्यधिक व्यस्त है, जिससे ऐसे बदलाव की संभावना कम है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि 20 जुलाई से पहले कोई विस्तार होता है, तो नए मंत्रियों के पास सत्र की तैयारी के लिए बहुत कम समय होगा। हालांकि, पहले भी सत्र के ठीक पहले फेरबदल के उदाहरण मिल चुके हैं, जैसे जुलाई 2021 में कैबिनेट में बड़े बदलाव किए गए थे।