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प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में तीन रेल मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी ने तीन महत्वपूर्ण रेल मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से रेलवे नेटवर्क 901 किलोमीटर तक बढ़ेगा, जिससे ट्रेनों की गति में सुधार होगा और कंजेशन में कमी आएगी। यह कदम क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न करेगा। जानें इन प्रोजेक्ट्स के सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ के बारे में।
 

महत्वपूर्ण रेल प्रोजेक्ट्स की स्वीकृति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी (CCEA) ने मंगलवार को तीन प्रमुख रेल मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी। इनमें नागदा-मथुरा, गुंटकल-वाड़ी और बुढ़वाल-सीतापुर में तीसरी और चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है, जिनकी कुल लागत लगभग 23,437 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।


प्रोजेक्ट्स के लाभ

CCEA ने बताया कि इन परियोजनाओं से रेलवे की कार्यक्षमता में सुधार होगा, ट्रेनों की गति में वृद्धि होगी और भीड़भाड़ में कमी आएगी। यह कदम प्रधानमंत्री मोदी के ‘नए भारत’ के दृष्टिकोण के अनुरूप क्षेत्रीय विकास को प्रोत्साहित करेगा, जिससे रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।


PM-गति शक्ति योजना के तहत योजना

इन परियोजनाओं की योजना PM-गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई है, जो मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाने पर केंद्रित है। यह नेटवर्क मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 19 जिलों में फैलेगा, जिससे भारतीय रेलवे नेटवर्क 901 किलोमीटर तक विस्तारित होगा।


सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

इन प्रस्तावित परियोजनाओं से लगभग 4,161 गांवों में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी, जिनकी कुल जनसंख्या लगभग 83 लाख है। ये ट्रैक महाकालेश्वर, रणथंभौर, कुनो और केवलादेव नेशनल पार्क, मथुरा, वृंदावन, मंत्रालयम और अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों तक ट्रेनों की सुविधा को बेहतर बनाएंगे।


पर्यावरणीय लाभ

रेलवे ने जानकारी दी है कि इन परियोजनाओं से कोयला, अनाज, सीमेंट, POL, आयरन और कंटेनर सहित 60 मिलियन टन प्रति वर्ष अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता में वृद्धि होगी। यह एक पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा-कुशल परिवहन का तरीका है, जिससे CO2 उत्सर्जन में 185 करोड़ किलो की कमी आएगी, जो लगभग सात करोड़ पेड़ों के लगाने के बराबर है।


व्यापार और रोजगार में वृद्धि

रेल नेटवर्क के विस्तार से न केवल व्यापार और लॉजिस्टिक्स में सुधार होगा, बल्कि नए रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। इसके साथ ही, यह कदम पर्यावरण संरक्षण और कनेक्टिविटी के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण साबित होगा।