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प्रधानमंत्री मोदी का 'मन की बात': वैश्विक संकट और एकता की आवश्यकता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने 'मन की बात' कार्यक्रम में वैश्विक संकटों पर चिंता व्यक्त की और देशवासियों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा के लिए वहां की सरकारों का आभार जताया और ऊर्जा संकट के बीच भारत की स्थिति पर चर्चा की। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि सामूहिक शक्ति से भारत इन कठिनाइयों का सामना करेगा। जानें उनके विचार और संदेश के बारे में अधिक जानकारी।
 

प्रधानमंत्री का संबोधन

रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष और पश्चिम एशिया में व्याप्त अशांति पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। पीएम मोदी ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियाँ सभी देशों को प्रभावित कर रही हैं, और भारत को इस चुनौती का सामना करने के लिए एकजुट होना आवश्यक है।


राजनीति और अफवाहों से बचने की अपील

प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अनुरोध किया कि इस संवेदनशील समय में एकजुट रहें। उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो इस गंभीर मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं या अफवाहें फैला रहे हैं। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि यह विषय 140 करोड़ भारतीयों के हित से जुड़ा है, इसलिए जनता को केवल सरकार द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।


खाड़ी देशों का आभार

युद्ध का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पिछले एक महीने से पड़ोस में भीषण संघर्ष चल रहा है। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में एक करोड़ से अधिक भारतीय निवास करते हैं। प्रधानमंत्री ने खाड़ी देशों की सरकारों का आभार व्यक्त किया कि वे इन कठिन परिस्थितियों में वहां रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और सहायता सुनिश्चित कर रहे हैं।


ऊर्जा संकट और भारत की स्थिति

पीएम मोदी ने स्वीकार किया कि युद्ध प्रभावित क्षेत्र भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं का मुख्य केंद्र है, जिसके कारण वैश्विक स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कमी हो रही है। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि पिछले एक दशक में भारत ने जो वैश्विक संबंध स्थापित किए हैं और आंतरिक शक्ति विकसित की है, उसकी बदौलत देश इन परिस्थितियों का मजबूती से सामना कर रहा है।


सामूहिक शक्ति पर विश्वास

संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जिस प्रकार भारत ने अतीत में कई बड़े संकटों का सामना सामूहिक शक्ति से किया है, उसी तरह इस बार भी 140 करोड़ नागरिक मिलकर इन कठिन परिस्थितियों पर विजय प्राप्त करेंगे।