प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति के बीच उच्च स्तरीय वार्ता
प्रधानमंत्री मोदी की ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत
पश्चिम एशिया में हो रहे कूटनीतिक परिवर्तनों के बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेश्कियन के साथ फोन पर महत्वपूर्ण चर्चा की। इस बातचीत में दोनों नेताओं ने हाल के घटनाक्रमों, शांति प्रयासों और भविष्य की दिशा पर गहन विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि पीएम मोदी ने ईरान और अमेरिका के बीच हाल में बनी सहमति का स्वागत किया। उन्होंने यह भी दोहराया कि किसी भी विवाद का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।
क्षेत्र में स्थायी शांति की आवश्यकता
पीएम मोदी ने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। बयान के अनुसार, बातचीत के दौरान ईरान के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी। मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं पर डॉ. मसूद पेज़ेश्कियन से चर्चा हुई। मैंने बातचीत में हुई प्रगति का स्वागत किया और आशा व्यक्त की कि निरंतर प्रयासों से इस क्षेत्र में स्थायी शांति आएगी।"
अयातुल्ला खामेनेई का अंतिम संस्कार
इससे पहले, पेज़ेश्कियन ने पीएम मोदी को ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था। खामेनेई का अंतिम संस्कार समारोह अगले सप्ताह आयोजित किया जाएगा। खबरों के अनुसार, भारत सरकार इस समारोह में प्रतिनिधि के रूप में बिहार के राज्यपाल अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा को भेजने की योजना बना रही है। अंतिम संस्कार की रस्में पांच से नौ जुलाई तक होंगी।
शांति समझौता और जलडमरूमध्य की स्थिति
अमेरिका और ईरान ने पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए 18 जून को 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' पर हस्ताक्षर किए थे। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर जैसे मध्यस्थों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन देशों ने पहले आठ अप्रैल को दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बनाई थी, जिसे बाद में वार्ता पूरी होने तक बढ़ा दिया गया। शांति समझौते के बाद, हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला गया, जो सामान्य परिस्थितियों में दुनिया की कुल ऊर्जा आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा है।