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प्रतीक यादव का अचानक निधन: रहस्य और जांच की प्रक्रिया

प्रतीक यादव, जो महज 38 वर्ष के थे, का हाल ही में निधन हो गया। उनकी मृत्यु के कारणों की जांच की जा रही है, और पोस्टमार्टम के लिए चार डॉक्टरों की टीम गठित की गई है। परिवार के सूत्रों के अनुसार, प्रतीक अपने घर के किचन में बेहोश पाए गए थे। उनकी पत्नी अपर्णा उस समय दिल्ली में थीं। जानें इस रहस्यमय मृत्यु के पीछे की कहानी और जांच की प्रक्रिया के बारे में।
 

प्रतीक यादव का निधन

38 वर्ष की आयु में प्रतीक यादव ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। लखनऊ के सिविल अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी मृत्यु हो चुकी थी। उन्हें मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया। उनकी मृत्यु के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। इस प्रक्रिया के लिए चार डॉक्टरों की एक टीम गठित की गई है, और वीडियोग्राफी भी की जाएगी।


मौत के कारणों की जांच

लखनऊ के सिविल अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, प्रतीक यादव के ड्राइवर ने अस्पताल पहुंचकर बताया कि उनकी तबीयत खराब हो गई है। जब डॉक्टर उनके घर पहुंचे, तो उन्हें मृत पाया गया। शव को सिविल अस्पताल लाया गया, जहां इसे संदिग्ध विषाक्तता का मामला मानकर पोस्टमार्टम के लिए केजीएमसी भेजा गया।


पोस्टमार्टम की प्रक्रिया

प्रतीक यादव के पोस्टमार्टम के लिए सीएमओ ने चार डॉक्टरों की एक टीम बनाई है, जो आधे घंटे में प्रक्रिया पूरी करेगी। इसके अलावा, केजीएमयू ने भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम गठित की है। पूरा पोस्टमार्टम कैमरे की निगरानी में किया जाएगा, और यह सुबह 10 बजे के आसपास शुरू होगा।


अचेत अवस्था में पाए गए

परिवार के सूत्रों के अनुसार, प्रतीक यादव अपने घर के किचन में बेहोश पाए गए थे। सुबह 4:55 बजे घर में मौजूद लोगों ने अस्पताल को सूचित किया। पुलिस ने प्रतीक के फोन को जब्त कर लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। उनकी पत्नी अपर्णा उस समय दिल्ली में थीं और पति के निधन की सूचना मिलने के बाद लखनऊ के लिए रवाना हुईं।


हाल ही में अस्पताल में भर्ती

कुछ दिन पहले प्रतीक यादव को लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका पल्मोनरी एम्बोलिज्म का इलाज चल रहा था। इस स्थिति में फेफड़ों की धमनी में रक्त का थक्का बन जाता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। पारिवारिक सूत्रों का कहना है कि उनकी स्थिति में सुधार होने के बावजूद डॉक्टर उन्हें डिस्चार्ज नहीं कर रहे थे, लेकिन उन्होंने जबरन अस्पताल से छुट्टी लेकर घर पर स्वास्थ्य लाभ लेना शुरू कर दिया था।