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पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का पुनः आरंभ

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की वार्षिक रथ यात्रा का पुनः आरंभ हुआ। बृहस्पतिवार को पहंडी प्रक्रिया में देरी के कारण रथ यात्रा शुक्रवार को शुरू हुई। लाखों भक्तों ने रथों को खींचने में भाग लिया। जानें इस धार्मिक उत्सव की विशेषताएँ और भक्तों का उत्साह।
 

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का पुनः आरंभ

ओडिशा के पुरी में वार्षिक रथ यात्रा उत्सव के दौरान भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों के रथों की यात्रा शुक्रवार को गुंडिचा मंदिर की ओर फिर से शुरू हो गई। अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की।


उन्होंने बताया कि बृहस्पतिवार को ‘पहंडी’ प्रक्रिया में देरी के चलते तीनों रथ 12वीं सदी के श्री जगन्नाथ मंदिर से लगभग 2.6 किलोमीटर दूर गुंडिचा मंदिर तक नहीं पहुँच पाए थे।


रात भर देवता रथों पर ही विराजमान रहे। ‘जय जगन्नाथ’ के उद्घोष के बीच शुक्रवार सुबह लाखों भक्तों ने भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के रथों को खींचना शुरू किया।


गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब, जो भगवान जगन्नाथ के मुख्य सेवक माने जाते हैं, ने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘‘निर्धारित रथ यात्रा के अगले दिन रथ खींचने में कोई समस्या नहीं है।’’


उन्होंने बताया कि कई बार रथ अपने गंतव्य तक समय पर नहीं पहुँच पाते और उन्हें अगले दिन खींचा जाता है। बृहस्पतिवार को अंधेरा होने के कारण रथ खींचने की प्रक्रिया रोक दी गई थी।


भगवान बलभद्र का ‘तालध्वज’ रथ ग्रैंड रोड पर लगभग 700 मीटर की दूरी तय करने के बाद मार्केट चौक पर रुक गया। इसी तरह देवी सुभद्रा का ‘दर्पदलन’ रथ लगभग 400 मीटर की दूरी तय करने के बाद मारिचिकोटे छक पर रुक गया, जबकि भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ केवल कुछ गज ही खींचा गया और वह मुख्य मंदिर के सिंहद्वार के पास ही रुका रहा।


श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) का अनुमान है कि इस रथ यात्रा में 10 से 12 लाख श्रद्धालु शामिल हुए, जबकि मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार यह संख्या आठ से नौ लाख थी।


एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरबिंद पाढ़ी ने पत्रकारों को बताया, ‘‘अनुष्ठानों में कोई देरी नहीं हुई, लेकिन पहंडी प्रक्रिया में एक घंटे से अधिक की देरी हुई।’’


उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा मुख्य द्वार पर करीब 40 मिनट तक आगे नहीं बढ़ सकी, जिसके कारण पहंडी में देरी हुई।


पाढ़ी ने बताया कि रथ खींचने की प्रक्रिया शुक्रवार सुबह साढ़े नौ बजे फिर से शुरू हुई और देवता रातभर रथों पर ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि तीनों देवता शुक्रवार रात भी रथों पर रहेंगे, जबकि गुंडिचा मंदिर में प्रवेश की शोभायात्रा शनिवार को आयोजित की जाएगी।