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पीयूष गोयल ने कांग्रेस की मुक्त व्यापार समझौतों पर की आलोचना

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस पार्टी की मुक्त व्यापार समझौतों, विशेषकर चीन के साथ हुए समझौतों, पर तीखी आलोचना की है। उन्होंने जयराम रमेश के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस ने 2006 में चर्चा शुरू की थी, लेकिन समझौते को अंतिम रूप देने में असफल रही। गोयल ने कांग्रेस के विकास-विरोधी रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी ने भारत के हितों को खतरे में डालने का साहस कैसे किया। इस लेख में गोयल के बयान और कांग्रेस के पिछले रिकॉर्ड पर चर्चा की गई है।
 

कांग्रेस पर गोयल की तीखी टिप्पणी

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कांग्रेस पार्टी की मुक्त व्यापार समझौतों, विशेषकर चीन के साथ हुए समझौतों, पर कड़ी आलोचना की। भारत-यूरोपीय संघ के मुक्त व्यापार समझौते पर जयराम रमेश के ट्वीट का जवाब देते हुए गोयल ने कहा कि उनकी प्रतिक्रिया "अंगूर खट्टे हैं" जैसी है। उन्होंने यह भी बताया कि कांग्रेस ने 2006 में इस मुद्दे पर चर्चा शुरू की थी, लेकिन 2007 में इसे आगे बढ़ाने के बावजूद समझौते को अंतिम रूप देने में असफल रही।


रमेश की आलोचना और कांग्रेस का रिकॉर्ड

गोयल ने रमेश की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें "विकास-विरोधी" माना जाता है और पर्यावरण मंत्री के रूप में उन्होंने देश के विकास को बाधित किया है। उन्होंने कांग्रेस से सवाल किया कि कैसे उन्होंने चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर विचार किया, जिससे भारत के हितों को खतरा हुआ। गोयल ने यह भी पूछा कि कांग्रेस ने भारत को क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) में शामिल होने की अनुमति कैसे दी, जो वास्तव में चीन और भारत के बीच एक मुक्त व्यापार समझौता था।


गोयल का बयान

गोयल ने मीडिया से बातचीत में कहा, "ये तो अंगूर खाते हैं वाली कहानी है। 2006 में बातचीत शुरू हुई, 2007 में आगे बढ़ी और 2013 में बंद हो गई। कांग्रेस के पास समझौते को अंतिम रूप देने की इच्छाशक्ति नहीं थी। यूपीए और कांग्रेस सरकारें डर के मारे कभी कोई निर्णायक कदम नहीं उठा सकीं।" उन्होंने कहा कि जयराम रमेश को विकास-विरोधी माना जाता है, और उनके कार्यों ने देश के विकास को रोक दिया।


कांग्रेस का पिछला रिकॉर्ड

गोयल ने आगे कहा कि कांग्रेस का रिकॉर्ड बेहद खराब है। उन्होंने जयराम रमेश जैसे नेताओं और कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि वे भारत को चीन के साथ मुक्त व्यापार समझौते में शामिल होने के लिए उकसा रहे थे। उन्होंने सीधे सवाल किया, "आपने भारत को आरसीईपी में शामिल होने देने के बारे में सोचा भी कैसे, जो असल में चीन और भारत के बीच एक एफटीए था?" उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस की एक गंभीर गलती थी और पार्टी को जनता को जवाब देना होगा कि उन्होंने भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने का साहस कैसे किया।