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पीएम मोदी से मिले म्यांमार के राष्ट्रपति: चीन की चिंताएं बढ़ीं

म्यांमार के राष्ट्रपति मिन ओंग हलाइन का भारत दौरा चीन की चिंताओं को बढ़ा रहा है। पीएम मोदी से उनकी मुलाकात एक महत्वपूर्ण संकेत है, जो दर्शाता है कि म्यांमार अब चीन पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है। जानें इस मुलाकात का महत्व और भारत-म्यांमार संबंधों पर इसके प्रभाव के बारे में।
 

म्यांमार के राष्ट्रपति का भारत दौरा

चीन ने जिस व्यक्ति को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग रखने की कोशिश की, वह अब पीएम मोदी से मिलने के लिए भारत पहुंच गया है। यह व्यक्ति, म्यांमार के राष्ट्रपति मिन ओंग हलाइन, एक महत्वपूर्ण सैन्य कमांडर हैं, जिनके पास ऐसे संसाधन हैं जिनकी तलाश में दुनिया की बड़ी शक्तियां हैं। चीन नहीं चाहता कि वह किसी अन्य नेता से मिले, लेकिन अब वह पीएम मोदी के साथ खड़ा है। मिन ओंग हलाइन ने 2011 में म्यांमार की सेना के प्रमुख के रूप में कार्य किया और फरवरी 2021 में एक सैन्य तख्तापलट के माध्यम से सत्ता पर काबिज हुए। अप्रैल 2026 में उन्हें राष्ट्रपति के रूप में चुना गया। म्यांमार इस समय गृह युद्ध का सामना कर रहा है, जिसमें विभिन्न जातीय उग्रवादी समूह सक्रिय हैं। चीन इन समूहों को हथियार मुहैया कराता है ताकि वह म्यांमार पर नियंत्रण बनाए रख सके। म्यांमार के पास दुनिया के दुर्लभ तत्वों का तीसरा सबसे बड़ा भंडार है, जिसका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों और अन्य तकनीकी उत्पादों में होता है।


चीन की निर्भरता और म्यांमार का नया मोड़

जिसे पागलों की तरह डरा रहा चीन, वो अचानक मोदी से मिलने आया!
चीन वैश्विक स्तर पर दुर्लभ तत्वों के रिफाइनिंग का लगभग 90% हिस्सा नियंत्रित करता है। 2017 से 2024 के बीच, म्यांमार ने चीन को 2900 टन से अधिक दुर्लभ तत्वों का निर्यात किया, जिसकी कीमत 4.2 बिलियन डॉलर थी। 2023 में, चीन द्वारा आयात किए गए भारी दुर्लभ तत्वों में से लगभग 98% म्यांमार से आया था। चीन म्यांमार पर निर्भर है, लेकिन यह एक कठोर साझेदार साबित हो रहा है। म्यांमार के राष्ट्रपति ने यह समझ लिया है और अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत का चयन किया है, जो एक महत्वपूर्ण संकेत है। म्यांमार अब चीन पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहता है। भारत म्यांमार के लिए एक स्वाभाविक विकल्प है, और यह दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो सकता है।


भारत-म्यांमार संबंधों का महत्व

भारत और म्यांमार के बीच 1643 किलोमीटर लंबी सीमा है। म्यांमार में चल रहे गृह युद्ध का लाभ चीन और अमेरिका दोनों उठा रहे हैं। म्यांमार के माध्यम से चीन मणिपुर में अशांति फैला रहा है, जबकि अमेरिका के एजेंट म्यांमार में आतंकियों को प्रशिक्षण दे रहे थे। यदि भारत और म्यांमार के बीच संबंध मजबूत होते हैं, तो इन उग्रवादी समूहों को समाप्त किया जा सकता है। म्यांमार के दुर्लभ तत्व भारत की आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा, भारत म्यांमार के माध्यम से थाईलैंड तक एक 1360 किलोमीटर का हाईवे बना रहा है, जो भारत को चीन के करीब पहुंचा सकता है। इसके साथ ही, कलादान मल्टी-मॉडल प्रोजेक्ट भी पूर्वोत्तर भारत को म्यांमार के रास्ते जोड़ने का कार्य कर रहा है।