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पीएम मोदी का ऐतिहासिक कार्यकाल: नेहरू के रिकॉर्ड को तोड़ने की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जून को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल करने के करीब हैं, जब वह लगातार सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बन जाएंगे। उन्होंने 2014 में पदभार संभाला था और अब उनके कार्यकाल की कुल अवधि 4399 दिन हो जाएगी, जो पंडित नेहरू के 4398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देगी। इस लेख में मोदी और नेहरू के कार्यकाल की तुलना की गई है, जिसमें सामाजिक न्याय, चुनावी राजनीति और जनसंख्या के बदलावों पर चर्चा की गई है।
 

प्रधानमंत्री मोदी का नया मील का पत्थर


भारत के राजनीतिक इतिहास में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियों के साथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल करने के करीब हैं। 10 जून को, वह लगातार सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बन जाएंगे। मोदी ने पहली बार 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इस दिन तक उनके कार्यकाल की कुल अवधि 4399 दिन हो जाएगी, जिससे वह पंडित जवाहरलाल नेहरू के 4398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ देंगे।


पंडित नेहरू का ऐतिहासिक कार्यकाल

भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में, पहली लोकसभा का गठन 17 अप्रैल, 1952 को हुआ था। पंडित नेहरू ने 13 मई, 1952 को प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और 27 मई, 1964 तक इस पद पर बने रहे। उनका कार्यकाल कुल 4398 दिनों का था, जो अब तक का सबसे लंबा निरंतर कार्यकाल माना जाता है।


इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड

नरेंद्र मोदी का कार्यकाल 26 मई 2014 से शुरू हुआ और 10 जून 2026 को यह 4399 दिनों का हो जाएगा। इंदिरा गांधी का कार्यकाल 24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977 तक था, जो 4077 दिनों का था। मोदी ने पिछले साल 25 जुलाई 2025 को इंदिरा गांधी के इस रिकॉर्ड को पार कर लिया।


विभिन्न चुनौतियों का सामना

पंडित नेहरू और पीएम मोदी ने अलग-अलग समय और परिस्थितियों में देश का नेतृत्व किया है। नेहरू के समय भारत की जनसंख्या लगभग 34 करोड़ थी, जबकि 2014 में मोदी के सत्ता में आने पर यह संख्या 131 करोड़ से अधिक हो चुकी थी। आज भारत की जनसंख्या 146 करोड़ के पार पहुंच चुकी है।


चुनावी राजनीति का स्वरूप भी बदल चुका है। 1951-52 के पहले आम चुनाव में 53 राजनीतिक दलों ने भाग लिया था, जबकि 2014 तक यह संख्या 464 हो गई। 2024 के चुनावों में 7445 राजनीतिक दलों ने भाग लिया।


सामाजिक न्याय का परिप्रेक्ष्य

नेहरू के तीसरे कार्यकाल (1957-1962) के दौरान केंद्रीय मंत्रिपरिषद में पिछड़े और वंचित समूहों का प्रतिनिधित्व बहुत कम था। उस समय अनुसूचित जाति से केवल तीन या चार सदस्य थे। इसके विपरीत, वर्तमान मोदी मंत्रिपरिषद में लगभग 60 प्रतिशत सदस्य पिछड़े, दलित और आदिवासी समुदाय से हैं।


महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। 1952 में महिला सांसदों की संख्या केवल 4.4 प्रतिशत थी, जो 2024 में बढ़कर 13.63 प्रतिशत हो गई है।