पाकिस्तानी क्रिकेटरों पर ड्रग्स तस्करी के गंभीर आरोप
केंद्रीय गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि ने पाकिस्तानी क्रिकेटरों पर भारत में ड्रग्स तस्करी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ का नाम लेते हुए कहा कि ये खिलाड़ी भारत में अपने दौरे के दौरान ड्रग्स लाते थे। मणि ने पूर्व कोच बॉब वूल्मर की संदिग्ध मौत को भी इस मामले से जोड़ा है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
Jul 14, 2026, 19:40 IST
ड्रग्स तस्करी के आरोप
केंद्रीय गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि ने यह गंभीर आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की क्रिकेट टीमें और उनके प्रतिनिधिमंडल भारत में अपने दौरे के दौरान नियमित रूप से ड्रग्स की तस्करी करते थे। मणि ने विशेष रूप से शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ का नाम लिया, जो दोनों पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर हैं। इन पर 2006 में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) द्वारा प्रतिबंधित पदार्थ 'नैंड्रोलोन' के लिए पॉजिटिव पाए जाने के कारण बैन लगाया गया था। PCB ट्रिब्यूनल के निर्णय के अनुसार, अख्तर पर दो साल का बैन और आसिफ पर एक साल का निलंबन लगाया गया था। उनके डोप टेस्ट सितंबर 2006 में पॉजिटिव आए थे, जिसके चलते उन्हें 17 अक्टूबर को जयपुर में श्रीलंका के खिलाफ चैंपियंस ट्रॉफी मैच से हटा दिया गया था।
मणि ने बताया कि 2006 से 2010 तक गृह मंत्रालय में काम करते हुए, उन्होंने शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ के मामले की जानकारी दी थी। जब पाकिस्तानी हाई कमिश्नर ने स्वीकार किया कि वे ड्रग्स लेकर आ रहे थे, तब उन्हें वापस भेज दिया गया था। मणि ने कहा कि यह एक रणनीति है, और जब भी पाकिस्तानी टीमें भारत आईं, उन्होंने यहाँ ड्रग्स की तस्करी की।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की आधिकारिक नीति के तहत भारत में ड्रग्स भेजना शामिल है। ये लोग जाने-माने हैं और पाकिस्तान क्रिकेट टीम के अन्य सदस्य भी इसी तरह के कार्यों में शामिल थे। मणि ने पूर्व कोच बॉब वूल्मर की संदिग्ध मौत को भी ड्रग तस्करी के खिलाफ उनके विरोध से जोड़ा। 2007 के क्रिकेट वर्ल्ड कप में आयरलैंड से हार के बाद, 18 मार्च 2007 को जमैका के किंग्स्टन में वूल्मर की मौत हुई थी।
मणि ने कहा कि वूल्मर, जो पाकिस्तानी खिलाड़ियों द्वारा की जा रही ड्रग तस्करी का विरोध कर रहे थे, की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। इन सभी घटनाओं को एक साथ जोड़कर देखना आवश्यक है। मणि ने बताया कि उस समय डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) के अनुसार, भारत में आतंकी हमलों के लिए 30% फंडिंग ड्रग्स के कारोबार से आती थी।