पाकिस्तान में मोटरवे गैंगरेप मामले में मौत की सजा की पुष्टि
लाहौर उच्च न्यायालय का निर्णय
पाकिस्तान की एक उच्च अदालत ने 2020 में एक फ्रांसीसी महिला के साथ हुए बलात्कार के मामले में दो दोषियों को दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा है। यह मामला, जिसे मोटरवे गैंगरेप कांड के नाम से जाना जाता है, ने पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। आतंकवाद विरोधी अदालत ने 20 मार्च, 2021 को आबिद अली उर्फ मल्ही और शफकत अली उर्फ बग्गा को आजीवन कारावास के साथ-साथ मौत की सजा सुनाई थी। हालांकि, दोनों ने अपनी सजा को चुनौती दी थी। एक अदालत अधिकारी के अनुसार, लाहौर उच्च न्यायालय ने आज इस मामले में दोषियों की अपील को खारिज कर दिया और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
मामले का विवरण
लाहौर उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति सैयद शाहबाज अली रिजवी और न्यायमूर्ति तारिक महमूद बाजवा शामिल थे, ने बुधवार, 3 जून को अपना फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष दोनों ने अपनी दलीलें पेश कीं। बचाव पक्ष ने यह दावा किया कि मामले में कई खामियां हैं, जिससे अभियोजन पक्ष के घटनाक्रम पर संदेह होता है। दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने दोषियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश किए और निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया।
2020 का सामूहिक बलात्कार मामला
सितंबर 2020 में एक भयावह सामूहिक बलात्कार की घटना सामने आई, जिसमें 32 वर्षीय महिला अपने तीन बच्चों के साथ लाहौर के पास सियालकोट-मोटरवे पर फंस गई थी। जब उनकी कार का ईंधन खत्म हो गया, तो दो हथियारबंद व्यक्तियों ने कार में घुसकर महिला को लूट लिया और उसे पास के एक खाली खेत में ले जाकर उसके बच्चों के सामने बलात्कार किया। इस मामले में 9 सितंबर, 2020 को गुज्जरपुरा पुलिस द्वारा पाकिस्तान दंड संहिता और आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस घटना ने व्यापक आक्रोश और त्वरित न्याय की मांग को लेकर सार्वजनिक प्रदर्शनों को जन्म दिया।