पाकिस्तान को IMF से बड़ा झटका: 7 अरब डॉलर के लिए 174 विधायी संशोधन आवश्यक
इस्लामाबाद में IMF कार्यक्रम की नई चुनौतियाँ
पाकिस्तान को अपने 7 अरब डॉलर के IMF कार्यक्रम के तहत लगभग 174 विधायी संशोधन संसद में प्रस्तुत करने होंगे। वित्त सचिव इमदादुल्लाह बोसल ने यह जानकारी नेशनल असेंबली की वित्त एवं राजस्व संबंधी स्थायी समिति को दी। उन्होंने बताया कि ये संशोधन संसद की मंजूरी के लिए पेश किए जाएंगे।
आर्थिक क्षेत्रों में प्रस्तावित बदलाव
रिपोर्टों के अनुसार, ये संशोधन कई महत्वपूर्ण आर्थिक क्षेत्रों से संबंधित हैं, जिनमें टैक्स व्यवस्था, ऊर्जा क्षेत्र, निजीकरण, सॉवरेन वेल्थ फंड, चीनी नीति, इस्लामिक बैंकिंग और राजकोषीय सुधार शामिल हैं। सरकार का कहना है कि ये बदलाव IMF कार्यक्रम के तहत की गई प्रतिबद्धताओं के अनुरूप होंगे।
IMF कार्यक्रम की चौथी समीक्षा
यह प्रक्रिया IMF के 7 अरब डॉलर के Extended Fund Facility (EFF) कार्यक्रम की चौथी समीक्षा से जुड़ी है। पाकिस्तान के वित्त विभाग के अनुसार, यह कार्यक्रम 2024 में मंजूर हुआ था, जिसका उद्देश्य भुगतान संतुलन की जरूरतों और व्यापक आर्थिक स्थिरता को समर्थन देना है।
ऊर्जा क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता
IMF कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र में सुधार भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। इसमें बिजली वितरण कंपनियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी और ऊर्जा क्षेत्र के वित्तीय दबाव से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। समिति में इन सुधारों के आर्थिक प्रभावों पर चर्चा की गई।
चीनी नीति और अन्य आर्थिक सुधार
पाकिस्तान में चीनी क्षेत्र की नीति में बदलाव भी IMF समीक्षा के दौरान चर्चा का विषय है। वित्त सचिव के अनुसार, तीन प्रांत इस नीति पर सहमत हैं, जबकि एक प्रांत ने कुछ आपत्तियां उठाई हैं। इसके अलावा, रेमिटेंस, टैक्स नीति और सरकारी खर्च में अनुशासन जैसे मुद्दों पर भी बातचीत जारी है।
संशोधनों का संसद में अनुमोदन
इस प्रकार, 174 प्रस्तावित विधायी बदलाव पाकिस्तान के IMF कार्यक्रम के व्यापक सुधार एजेंडे का हिस्सा हैं। इन पर आगे की प्रक्रिया संसद में होगी, और इनके वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेंगे कि प्रस्तावित संशोधनों को किस रूप में मंजूरी मिलती है और उन्हें कैसे लागू किया जाता है।