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पाकिस्तान की सेना की नाकामी: चीन के दबाव में भारत पर उंगली उठाने की कोशिश

पाकिस्तान की सेना वर्तमान में गंभीर संकट का सामना कर रही है, जहां बलूचिस्तान में लगातार हमलों के कारण उसकी स्थिति कमजोर हो गई है। चीन ने इस्लामाबाद को फंडिंग रोकने की चेतावनी दी है, जिससे आसिम मुनीर ने भारत पर आरोप लगाकर अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश की है। इस लेख में जानें कि कैसे पाकिस्तान की सेना अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए नए शब्दों का सहारा ले रही है और चीन के गुस्से का सामना कर रही है।
 

पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में संकट

इस्लामाबाद: जब कोई देश अपनी आंतरिक समस्याओं से जूझता है, तो वह अक्सर अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए दूसरों पर आरोप लगाने लगता है। वर्तमान में, बलूच लड़ाकों के हाथों लगातार हार का सामना कर रही पाकिस्तानी सेना भी इसी स्थिति में है। बलूचिस्तान में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) पर हो रहे हमलों से चिंतित चीन ने इस्लामाबाद को फंडिंग रोकने की चेतावनी दी, जिससे पाकिस्तानी सेना के प्रमुख आसिम मुनीर की स्थिति कमजोर हो गई। अपनी बेइज्जती को छिपाने के लिए मुनीर ने बिना किसी प्रमाण के भारत पर आरोप लगाते हुए 'फितना-अल-हिंदुस्तान' का राग अलापना शुरू कर दिया।


बलूचिस्तान में सुरक्षा की कमी

बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने हाल ही में सुरक्षाबलों को ले जा रही जफर एक्सप्रेस पर एक बड़ा हमला किया, जिसने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी। अपनी नाकामी को छिपाने के लिए, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने ईद-उल-अजहा के अवसर पर बलूचिस्तान के झोब और क्वेटा में फ्रंटलाइन जवानों से मुलाकात की। वहां उन्होंने अपनी सेना की कमियों को सुधारने के बजाय इसे एक विदेशी साजिश करार दिया।


भारत पर आरोप लगाने की नई रणनीति

पाकिस्तानी सेना ने अपनी असफलताओं को छिपाने के लिए 'फितना-अल-हिंदुस्तान' जैसे नए शब्दों का सहारा लिया है। जब भी देश में कानून-व्यवस्था बिगड़ती है, रावलपिंडी के अधिकारी इस शब्द का उपयोग करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एक पुरानी रणनीति है, जिसका उद्देश्य जनता का ध्यान भटकाना है। इस बार भी मुनीर ने यही किया ताकि लोग सेना की नाकामी पर सवाल न उठाएं।


चीन का अल्टीमेटम

चीन ने इस्लामाबाद को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसके नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो वह भविष्य में मिलने वाले सभी फंड रोक देगा। यह पाकिस्तान के लिए एक गंभीर संकट है, क्योंकि वह आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में है।


पाकिस्तानी सेना की स्थिति

आसिम मुनीर ने संविधान में बदलाव कर खुद को फील्ड मार्शल और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज घोषित किया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि सेना का मनोबल बहुत गिर चुका है। बॉर्डर पर तैनात सैनिकों का हौसला सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बलूचिस्तान अब मुनीर की सेना के नियंत्रण से बाहर हो चुका है, और भारत पर आरोप लगाना उनकी लाचारी को दर्शाता है।