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पाकिस्तान की आर्थिक चिंताएं: बंगाल चुनाव के बाद की रिपोर्ट

भारत की सत्ताधारी पार्टी पश्चिम बंगाल में जीत का जश्न मना रही है, जबकि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में राजनीतिक चिंताएं बढ़ गई हैं। एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान का वस्तु व्यापार घाटा 20 प्रतिशत बढ़कर 32 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इस स्थिति ने देश की अर्थव्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। जानिए इस रिपोर्ट में और क्या जानकारी दी गई है, जिसने पाकिस्तान में हड़कंप मचा दिया है।
 

बंगाल में जीत और पाकिस्तान में चिंता

भारत की सत्ताधारी पार्टी जहां पश्चिम बंगाल में अपनी जीत का जश्न मना रही है, वहीं पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में राजनीतिक हालात चिंताजनक हो गए हैं। बंगाल चुनाव के परिणामों के 24 घंटे बाद पाकिस्तान से एक रिपोर्ट आई है, जिसने वहां हड़कंप मचा दिया है। इस रिपोर्ट के आने की किसी को भी उम्मीद नहीं थी। आइए जानते हैं कि यह रिपोर्ट क्या है, जिसने पाकिस्तान में चिंता का माहौल बना दिया है।


रिपोर्ट की मुख्य बातें

एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान का वस्तु व्यापार घाटा चालू वित्त वर्ष के पहले 10 महीनों में 20 प्रतिशत बढ़कर 32 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इससे देश की कमजोर अर्थव्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स (पीबीएस) के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 'द न्यूज' ने बताया कि आयात का मूल्य निर्यात की तुलना में दोगुने से भी अधिक रहा। वित्त वर्ष 2025-26 (1 जुलाई से 30 जून) की जुलाई-अप्रैल अवधि में आयात लगभग 7 प्रतिशत बढ़कर 57.2 अरब डॉलर हो गया, जबकि निर्यात 6 प्रतिशत से अधिक घटकर 25.2 अरब डॉलर रह गया। इस असमानता को अर्थशास्त्रियों ने विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डालने वाला बताया है।


अप्रैल में व्यापार घाटा

रिपोर्ट के अनुसार, यह गिरावट अप्रैल 2026 में भी जारी रही, जब मासिक व्यापार घाटा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 4 प्रतिशत बढ़कर 4 अरब डॉलर से थोड़ा अधिक हो गया। मासिक निर्यात 14 प्रतिशत बढ़कर 2.48 अरब डॉलर हो गया, लेकिन यह आयात की तुलना में कम रहा, जो 7.5 प्रतिशत बढ़कर 6.55 अरब डॉलर तक पहुंच गया। सेवा व्यापार के क्षेत्र में कुछ राहत मिली है। वित्त वर्ष 2025-26 की जुलाई-मार्च अवधि के दौरान सेवाओं का व्यापार घाटा 6.7 प्रतिशत घटकर 2.15 अरब डॉलर रहा। सेवा निर्यात 17 प्रतिशत बढ़कर 7.35 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवा आयात लगभग 11 प्रतिशत बढ़कर 9.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया।