पाकिस्तान का ईरान को गुप्त सैन्य सहायता: अमेरिका के साथ बढ़ता तनाव
पाकिस्तान और ईरान के बीच सैन्य सहयोग का खुलासा
हालिया रिपोर्टों में यह सामने आया है कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच, पाकिस्तान ने ईरान को गुप्त सैन्य सहायता प्रदान की है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को अपने नूर खान एयरबेस पर सुरक्षित स्थान दिया, जिससे उन्हें संभावित अमेरिकी हमलों से बचाया जा सके। यह जानकारी वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर रही है, क्योंकि पाकिस्तान एक ओर मध्यस्थ की भूमिका निभाने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उस पर अमेरिका के साथ 'दोहरी चाल' चलने के आरोप लग रहे हैं। अमेरिकी सीनेटरों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, और यदि ये आरोप सही साबित होते हैं, तो पाकिस्तान को इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का बयान
एक प्रमुख मीडिया चैनल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि पाकिस्तान ने ईरानी विमानों को अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए अपने एयरबेस पर सुरक्षित पार्क करने की अनुमति दी थी। यह खुलासा तब हुआ है जब पाकिस्तान खुद को दोनों देशों के बीच एक 'तटस्थ मध्यस्थ' के रूप में पेश कर रहा था। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल की शुरुआत में, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने युद्धविराम की घोषणा की, ईरान ने कई विमानों को पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर भेजा।
अमेरिकी सीनेटरों की प्रतिक्रिया
इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने सोशल मीडिया पर लिखा, "यदि यह रिपोर्ट सही है, तो पाकिस्तान की भूमिका का पुनर्मूल्यांकन करना आवश्यक होगा।" उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल के प्रति पाकिस्तानी अधिकारियों के पिछले बयानों को देखते हुए, यदि यह सच निकलता है तो कोई आश्चर्य नहीं होगा।
पाकिस्तान का खंडन
हालांकि, एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियां छिपी नहीं रह सकतीं, क्योंकि यह एयरबेस एक घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित है।
क्षेत्रीय तनाव और ईरान की स्थिति
अफगानिस्तान के एक नागरिक उड्डयन अधिकारी ने बताया कि एक ईरानी विमान काबुल में उतरा था और बाद में उसे हेरात हवाई अड्डे पर स्थानांतरित किया गया। तालिबान के प्रवक्ता ने ईरानी विमानों की मौजूदगी से जुड़ी रिपोर्टों को खारिज किया। इन घटनाक्रमों ने ईरान-अमेरिका संकट के दौरान पाकिस्तान की संतुलन साधने की नीति को उजागर किया है।
तनाव बना हुआ है
सीज़फ़ायर की घोषणा के बावजूद, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है। ईरानी मीडिया के अनुसार, संघर्ष समाप्त करने के लिए ईरान ने अमेरिका से युद्ध के हर्जाने और अन्य मांगें की हैं। ट्रंप ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।