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पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति, तनाव बढ़ा

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हालात अब युद्ध की स्थिति में पहुंच गए हैं। दोनों देशों के बीच हालिया हवाई हमले और जमीनी संघर्ष ने तनाव को बढ़ा दिया है। तालिबान ने पाकिस्तानी चौकियों पर बड़े हमले का दावा किया है, जबकि पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई की है। इस संघर्ष के पीछे ऐतिहासिक विवाद और वर्तमान राजनीतिक स्थिति का बड़ा हाथ है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
 

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति

दक्षिण एशिया की पश्चिमी सीमा पर हालात अब आधिकारिक रूप से युद्ध की स्थिति में पहुंच गए हैं। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अफगानिस्तान के साथ अब खुली लड़ाई चल रही है। यह बयान तब आया जब दोनों देशों के बीच हालिया हवाई हमले, जमीनी संघर्ष और चौकियों पर कब्जे के दावे सामने आए। तालिबान ने यह दावा किया है कि उसने पाकिस्तानी सीमा चौकियों पर बड़े पैमाने पर हमला कर एक दर्जन से अधिक चौकियों पर कब्जा कर लिया है, 19 चौकियां और दो सैन्य ठिकाने नष्ट किए हैं और कई सैनिकों को मार गिराया या पकड़ा है। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने ऑपरेशन गजब लिल हक के तहत काबुल, कंधार और पकतिया में बड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।


आज सुबह काबुल में विस्फोटों और लड़ाकू विमानों की आवाज से दहशत फैल गई। कुछ घंटे पहले, अफगान बलों ने कहा था कि उन्होंने विवादित डूरंड लाइन पर पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बनाया है। पाकिस्तान ने जवाब में हवाई हमले किए और कहा कि यह कार्रवाई सीमा पार से बिना उकसावे की गोलीबारी के जवाब में की गई है। अफगान रक्षा मंत्रालय का कहना है कि लड़ाई आधी रात तक चली और उसके बाद स्थिति काबू में आई। पाकिस्तान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उसके केवल दो सैनिक मारे गए और तीन घायल हुए, जबकि 36 अफगान लड़ाके मारे गए। दूसरी ओर, अफगानिस्तान का दावा है कि 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और कई पकड़े गए। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।


तनाव की शुरुआत और डूरंड रेखा का विवाद

तनाव की शुरुआत पिछले रविवार को पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों से हुई। इस्लामाबाद का कहना था कि उसने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के ठिकानों को निशाना बनाया। लेकिन काबुल ने आरोप लगाया कि हमले नागरिक इलाकों पर हुए और उसकी संप्रभुता का उल्लंघन किया गया। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि सीमा पार कार्रवाई बार-बार की गई पाकिस्तानी हरकतों के जवाब में थी। डूरंड रेखा 2640 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसे 1893 में ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव मोर्टिमर डूरंड ने अफगान शासक अमीर अब्दुर रहमान खान पर थोपा था। अफगान पक्ष का तर्क है कि यह स्थायी अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं थी, बल्कि प्रभाव क्षेत्र की रेखा थी। यही ऐतिहासिक घाव आज भी जंग का कारण बना हुआ है।


पाकिस्तानी एफ-16 विमान के गिरने का दावा

दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ाने वाला दावा था पाकिस्तानी एफ-16 विमान को गिराने का। अफगान बलों से जुड़े खातों ने एक वीडियो साझा कर कहा कि अमेरिकी निर्मित एफ-16 लड़ाकू विमान को गिरा दिया गया। पाकिस्तान ने इस दावे को खारिज किया, लेकिन इस दावे ने मनोवैज्ञानिक मोर्चे पर असर डाला है। एफ-16 पाकिस्तान वायुसेना की सबसे महत्वपूर्ण ताकतों में से एक है। यदि तालिबान सीमित संसाधनों के बावजूद उसे चुनौती देने का संदेश दे रहा है, तो यह संकेत है कि युद्ध केवल जमीन पर नहीं, बल्कि आसमान में भी फैल सकता है।


संयुक्त राष्ट्र की अपील और स्थिति की गंभीरता

रिपोर्टों के अनुसार, तोरखम सीमा के पास एक शिविर में गोला गिरने से कई नागरिक घायल हुए हैं। दोनों देशों ने सीमावर्ती गांवों को खाली कराया है। हालात इतने गंभीर हैं कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करने की अपील की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी रमजान के पवित्र महीने का हवाला देते हुए संयम और बातचीत पर जोर दिया है। इसके बावजूद, जमीनी सच्चाई यह है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हिंसा शुरू करने का आरोप लगा रहे हैं और गोलाबारी रुक-रुक कर जारी है।


पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों का इतिहास

1947 के बाद से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते अविश्वास और कटुता से भरे रहे हैं। सोवियत हस्तक्षेप से लेकर अमेरिका के अभियान तक, हर दौर में पाकिस्तान ने अफगान प्रतिरोध का समर्थन किया, लेकिन आज वही जमीन उसके लिए चुनौती बन गई है। यह टकराव पाकिस्तान के लिए दो मोर्चों का खतरा पैदा करता है। एक ओर आर्थिक संकट, दूसरी ओर पश्चिमी सीमा पर खुली जंग। तालिबान की रणनीति स्पष्ट है; वह सीमित संसाधनों से तेज हमला करता है, चौकियों पर कब्जे का दावा कर मनोबल बढ़ाता है और फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर नागरिक नुकसान का मुद्दा उठाकर नैतिक दबाव बनाता है।


खुली जंग का ऐलान और भविष्य की चुनौतियाँ

खुली जंग का ऐलान संकेत है कि हालात नियंत्रण से बाहर जा सकते हैं। इस समय तालिबान रक्षात्मक नहीं, बल्कि आक्रामक मुद्रा में दिख रहा है। पाकिस्तान के लिए यह केवल सीमा संघर्ष नहीं, बल्कि एक रणनीतिक चुनौती है, जहां हर गलत कदम पूरे क्षेत्र को लंबे अस्थिर दौर में धकेल सकता है।