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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: फलोदी सट्टा बाजार में बदलाव से बढ़ी राजनीतिक हलचल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित होने वाले हैं, और इस समय फलोदी सट्टा बाजार में बदलाव ने राजनीतिक हलचल को बढ़ा दिया है। पहले टीएमसी को बढ़त मिलती दिख रही थी, लेकिन अब भाजपा को 150 से 152 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। जानें अन्य राज्यों की स्थिति और सट्टा बाजार की भविष्यवाणियाँ क्या कहती हैं।
 

पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम की प्रतीक्षा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे, और इस समय राजनीतिक माहौल में तनाव बढ़ता जा रहा है। चुनाव परिणामों से पहले विभिन्न भविष्यवाणियों का दौर जारी है, जिसमें कभी भाजपा को बढ़त मिलती है तो कभी ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को। सट्टा बाजार भी इस चुनाव को लेकर काफी सक्रिय है। जैसे-जैसे मतगणना का दिन नजदीक आ रहा है, फलोदी सट्टा बाजार में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।


फलोदी सट्टा बाजार ने पलट डाले सारे एक्जिट पोल, लेटेस्ट भविष्यवाणी तो कुछ और कह रही?


फलोदी सट्टा बाजार के नवीनतम आकलन ने सभी को चौंका दिया है। पहले के एग्जिट पोल के विपरीत, अब दूसरे चरण की वोटिंग के बाद भाजपा को 150 से 152 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है, जबकि टीएमसी को 137 से 140 सीटों के बीच सिमटने का अनुमान है।


फलोदी सट्टा बाजार की भविष्यवाणी का महत्व

फलोदी सट्टा बाजार में यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव से पहले यह टीएमसी को बढ़त दे रहा था, जबकि भाजपा को लगभग 100 सीटों पर आंक रहा था।


भवानीपुर सीट, जहां ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी चुनावी मुकाबले में हैं, वहां भी सट्टा बाजार का रुख बदल गया है। ममता बनर्जी की स्थिति में गिरावट का संकेत देते हुए उनके भाव 20-25 पैसे से बढ़कर 50 पैसे तक पहुंच गए हैं। पहले टीएमसी को बढ़त मिल रही थी, लेकिन अब भाजपा को पूर्ण बहुमत के साथ 150 से अधिक सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है।


अन्य राज्यों की स्थिति

अन्य राज्यों की बात करें तो असम में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को 98 से 100 सीटों के बीच दिखाया जा रहा है, जबकि कांग्रेस को 24 से 26 सीटों पर सिमटने का अनुमान है। तमिलनाडु में NDA को लगभग 100 सीटें और INDIA गठबंधन को 140 सीटों के आसपास बढ़त मिलती दिख रही है।


केरल में UDF को 80 सीटें और LDF को 60 सीटें मिलने की संभावना है। चुनावी प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ इन आंकड़ों में भी बदलाव संभव है।