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पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड मतदान: क्या बदलाव की आहट है?

पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए मतदान में 92.88% का रिकॉर्ड बना है, जो भारत के इतिहास में सबसे अधिक है। इस लेख में हम पिछले चुनावों के आंकड़ों का विश्लेषण करते हैं और यह समझने की कोशिश करते हैं कि क्या यह बदलाव का संकेत है। क्या मतदाता संख्या में कमी और मतदान प्रतिशत में वृद्धि का कोई विशेष अर्थ है? जानें इस लेख में।
 

पश्चिम बंगाल में मतदान का नया रिकॉर्ड

पश्चिम बंगाल में मतदान का प्रतिशत 92.88% तक पहुंच गया है, जो भारत के इतिहास में किसी राज्य में एक ही चरण में या कुल मिलाकर सबसे अधिक है। इस वर्ष 2026 में पुडुचेरी में 91% से अधिक मतदान हुआ था, लेकिन पश्चिम बंगाल ने उस रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। पिछले चुनावों पर गौर करें तो यह सवाल उठता है कि क्या वास्तव में कोई बड़ा परिवर्तन होने वाला है। पहले चरण में रिकॉर्ड तोड़ मतदान हुआ है। चुनाव आयोग ने पहले चरण के मतदान के आंकड़े जारी किए हैं। 152 सीटों पर 3 करोड़ 60 लाख मतदाता थे, जिनमें से 3 करोड़ 34 हजार वोट पड़े। पहले चरण में 92.88% मतदान हुआ है।


इस रिकॉर्ड मतदान के संकेत क्या हैं? 1991 में 76.89% मतदान हुआ था, जबकि 1996 में यह बढ़कर 82.94% हो गया था। उस समय 6.14% का इजाफा हुआ था, लेकिन परिणाम में लेफ्ट सरकार बनी रही। 2006 में 81.97% और 2011 में 86.06% मतदान हुआ, जिसमें 4.09% का इजाफा हुआ और टीएमसी सत्ता में आई। 2021 में 81.56% मतदान हुआ था, जबकि 2026 में यह 92.88% तक पहुंच गया है, जो 11.32% का इजाफा दर्शाता है। सभी की नजरें 4 मई को परिणामों पर रहेंगी।


पश्चिम बंगाल के पिछले चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि जब 6% वोटों का बदलाव हुआ, तो लेफ्ट को सत्ता से बाहर होना पड़ा। अब 11.32% का अंतर आ चुका है, लेकिन दूसरे चरण का मतदान अभी बाकी है।


मतदाता संख्या में कमी का प्रभाव

पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में इस बार 42 लाख कम लोगों ने मतदान किया है। इसका कारण यह है कि एसआईआर के बाद कई मृत मतदाता और अवैध मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। मृत मतदाता वे होते हैं जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके नाम मतदाता सूची में थे। इस बार मतदान प्रतिशत बढ़ा है, क्योंकि कुल मतदाताओं की संख्या कम हो गई है।


उदाहरण के लिए, यदि 100 मतदाता हैं और उनमें से 52 वोट देते हैं, तो मतदान प्रतिशत 52% होगा। लेकिन यदि आप मतदाता सूची को घटाकर 60 कर देते हैं और फिर भी 52 वोट मिलते हैं, तो मतदान प्रतिशत लगभग 90% हो जाएगा। यही स्थिति इस बार भी हुई है।