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पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाने पर प्रशांत भूषण की चिंता

प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित व्यक्तियों के अन्य अधिकार भी छिन सकते हैं। निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। भूषण ने चेतावनी दी कि मतदान का अधिकार सभी लोकतांत्रिक अधिकारों की नींव है। इस मुद्दे पर राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने भी अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं।
 

मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाने की समस्या

प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण ने रविवार को पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इससे प्रभावित व्यक्तियों के अन्य अधिकार भी छिन सकते हैं।


निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। भूषण ने एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि यह घटनाक्रम लोगों को मताधिकार से वंचित करने के प्रयास का संकेत देता है।


मताधिकार का महत्व

भूषण ने कहा कि मतदान का अधिकार सभी लोकतांत्रिक अधिकारों की नींव है। उन्होंने चेतावनी दी, "यदि मतदान का अधिकार छीन लिया जाता है, तो इससे अन्य अधिकारों के कमजोर या समाप्त होने का मार्ग प्रशस्त होगा।"


इस संवाददाता सम्मेलन में उपस्थित राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने भी चेतावनी दी कि एसआईआर प्रक्रिया के तहत लाखों मतदाताओं के नाम हटाने का प्रभाव केवल मताधिकार तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि यह अन्य पहचान-आधारित अधिकारों को भी प्रभावित कर सकता है।


पहचान प्रणालियों पर प्रभाव

यादव ने यह भी कहा कि जिन व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, वे अन्य पहचान प्रणालियों में जांच के दायरे में आने वाले पहले लोग हो सकते हैं। उन्होंने कहा, "आज यह मतदाता सूची है, कल आधार जैसे पहचान दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए जा सकते हैं। जिनका नाम पहले ही सूची से हटा दिया गया है, वे सबसे पहले प्रभावित हो सकते हैं।"