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पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ ग्रामीणों की आवाज़ उठी

पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में हाल ही में हुए घटनाक्रम ने ममता बनर्जी के शासनकाल में फैले भ्रष्टाचार और कट मनी के खेल को उजागर किया है। ग्रामीण अब खुलकर सामने आ रहे हैं और अपनी मेहनत की कमाई वापस पा रहे हैं। इस लेख में जानें कैसे सत्ता परिवर्तन के बाद लोग अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं और योजनाओं में हुए भ्रष्टाचार का पर्दाफाश हो रहा है।
 

भ्रष्टाचार का पर्दाफाश

कूचबिहार जिले के माथाभांगा क्षेत्र में हाल ही में हुई घटनाओं ने ममता बनर्जी के शासन में फैले भ्रष्टाचार और कट मनी के खेल को उजागर किया है। वर्षों से, गरीब ग्रामीणों और छोटे व्यापारियों को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए स्थानीय गुंडों और तृणमूल कांग्रेस से जुड़े व्यक्तियों को भारी रकम चुकानी पड़ती थी। अब सत्ता परिवर्तन के बाद, स्थिति में बदलाव आ रहा है और ग्रामीणों को उनकी मेहनत की कमाई वापस मिल रही है। यह घटनाक्रम न केवल पूर्व शासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आम लोगों का हक किस प्रकार छीना गया था।


कट मनी की वसूली का खुलासा

माथाभांगा के कई निवासियों ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने, जमीन या मकान खरीदने-बेचने, और व्यापार करने के लिए उन्हें कट मनी चुकानी पड़ती थी। आरोप है कि 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस की जीत के बाद यह वसूली और अधिक संगठित हो गई। गरीब परिवारों को धमकाया जाता था कि यदि उन्होंने पैसे नहीं दिए, तो उनकी अगली किस्त रोक दी जाएगी। कई लाभार्थियों से 15,000 से 20,000 रुपये तक वसूले गए।


ग्रामीणों का संघर्ष

अब जब राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई है, तो ग्रामीण खुलकर सामने आ रहे हैं। जिन लोगों ने वर्षों तक डर के कारण चुप्पी साधी, वे अब अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। कई स्थानों पर कट मनी वसूलने वालों के घरों के बाहर प्रदर्शन किए गए हैं। कुछ स्थानों पर कट मनी वसूलने वालों के खिलाफ मारपीट की भी घटनाएं सामने आई हैं। इसके बाद, दबाव बढ़ने पर कई स्थानीय तृणमूल कांग्रेस के नेता और गुंडे कट मनी लौटाने लगे हैं।


अभूतपूर्व दृश्य

माथाभांगा के सुभाषपल्ली क्षेत्र में आवास योजना के लाभार्थियों को उनकी रकम वापस मिल गई है। वहीं, पचागढ़ ग्राम पंचायत के फकीरेरकुठी गांव में ग्रामीणों को खुले मैदान में बुलाकर नकद राशि लौटाई गई। यह दृश्य अपने आप में अभूतपूर्व था। गांव के स्कूल के मैदान में विशेष सभा आयोजित की गई, जहां लोगों को नाम पुकारकर पैसे लौटाए गए। जिन नेताओं पर अवैध वसूली के आरोप लगे, उनमें से कुछ फरार बताए जा रहे हैं।


भ्रष्टाचार का नया चेहरा

एक ग्रामीण ने बताया कि जमीन विवाद सुलझाने के नाम पर उससे भारी रकम ली गई थी, लेकिन कोई काम नहीं हुआ। जब उसे पता चला कि लोगों को पैसे वापस मिल रहे हैं, तो उसने भी अपना नाम दर्ज कराया और अंततः उसे उसकी रकम लौटा दी गई। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि ममता बनर्जी के शासन में बिना पैसे दिए कोई भी काम संभव नहीं था।


घोषणा और बदलाव

माथाभांगा के घुघुमारी क्षेत्र में रिक्शे पर लाउडस्पीकर लगाकर घोषणा की गई कि जिन लोगों ने कट मनी दी थी, वे पंचायत सदस्य के घर जाकर अपनी रकम वापस ले सकते हैं। यह दृश्य राज्य की राजनीति में एक नए बदलाव का संकेत माना जा रहा है। स्थानीय भाजपा नेताओं का कहना है कि अब ग्रामीण डरने की बजाय खुलकर सामने आ रहे हैं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।


लक्ष्मी भंडार योजना में भ्रष्टाचार

नदिया जिले से एक और घटना ने ममता बनर्जी सरकार के दौरान योजनाओं में हुए भ्रष्टाचार की गंभीरता को उजागर किया है। लक्ष्मी भंडार योजना में 173 पुरुषों के नाम लाभार्थियों की सूची में पाए गए, जबकि यह योजना केवल महिलाओं के लिए थी। जिला प्रशासन ने इन नामों को सूची से हटाकर जांच शुरू कर दी है।


भ्रष्टाचार की गहराई

भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि लक्ष्मी भंडार योजना में लाखों फर्जी लाभार्थी शामिल किए गए। उनका कहना है कि महिलाओं के नाम पर चलाई जा रही योजना में पुरुषों का पैसा लेना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि पूर्ववर्ती शासन में भ्रष्टाचार किस हद तक पहुंच चुका था। यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित घोटाले की ओर संकेत करता है।


राजनीतिक बदलाव का संकेत

कूचबिहार और नदिया की ये घटनाएं पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत दे रही हैं। जहां पहले सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए गरीबों को रिश्वत देनी पड़ती थी, वहीं अब वही लोग अपनी मेहनत की कमाई वापस पा रहे हैं। साथ ही योजनाओं में फर्जी लाभार्थियों का खुलासा यह साबित करता है कि ममता बनर्जी के शासनकाल में भ्रष्टाचार व्यवस्था का हिस्सा बन चुका था। अब जनता खुलकर सवाल पूछ रही है और अपने अधिकारों के लिए सामने आ रही है।