पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
पश्चिम बंगाल के सिलीगुडी में भारत-बांग्लादेश सीमा पर कांटेदार बाड़ लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे स्थानीय निवासियों में सुरक्षा का नया विश्वास जागा है। यह कदम वर्षों से चल रहे घुसपैठ और तस्करी के खतरों को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों का मानना है कि अब वे निश्चिंत होकर खेती और पशुपालन कर सकते हैं। सरकार ने सीमा सुरक्षा को लेकर गंभीरता दिखाई है, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा की नई लकीर खींची जा रही है।
May 22, 2026, 13:32 IST
सीमा पर कांटेदार बाड़ लगाने की प्रक्रिया शुरू
सिलीगुडी के फांसीदेवा क्षेत्र में भारत-बांग्लादेश सीमा पर वह कार्य प्रारंभ हो गया है, जिसका स्थानीय निवासियों को लंबे समय से इंतजार था। अब आधिकारिक रूप से सीमा पर कांटेदार बाड़ लगाने का कार्य शुरू हो चुका है, जिससे उन लोगों के चेहरे पर राहत की लहर दौड़ गई है, जो वर्षों से घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार अपराधों के डर में जी रहे थे। पश्चिम बंगाल सरकार ने सीमा सुरक्षा बल को 27 किलोमीटर भूमि आवंटित की है, जिसमें से 18 किलोमीटर का हिस्सा बाड़ लगाने के लिए और 9 किलोमीटर का हिस्सा सीमा चौकियों की स्थापना के लिए निर्धारित किया गया है। यह निर्णय सीमा पर लंबे समय से फैले भय और अव्यवस्था पर एक महत्वपूर्ण प्रहार माना जा रहा है।
ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर सरकार की गंभीरता
फांसीदेवा से लेकर बसिरहाट तक के गांवों में इस निर्णय का स्वागत किया गया है। स्थानीय लोग मानते हैं कि अब उन्हें पहली बार यह अहसास हो रहा है कि सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर है। वर्षों से इन क्षेत्रों में रात होते ही डर का माहौल बन जाता था। सीमा पार से होने वाली संदिग्ध गतिविधियों, मवेशी चोरी, अवैध घुसपैठ और तस्करी ने लोगों का जीवन कठिन बना दिया था। किसान खेतों में जाने से डरते थे, परिवार रातभर जागकर अपने घरों की रक्षा करते थे, और महिलाएं तथा बुजुर्ग हमेशा असुरक्षा के साये में जीते थे।
नई सुरक्षा व्यवस्था का प्रभाव
अब स्थिति में सुधार होता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बाड़ लगने के बाद वे निश्चिंत होकर खेती कर रहे हैं, पशुपालन कर रहे हैं और रात में आराम से सो पा रहे हैं। सीमा के निकट रहने वाले लोगों के लिए यह केवल बाड़ नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान की नई दीवार बन गई है। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि यह कदम पहले उठाया गया होता, तो उन्हें वर्षों तक भय और नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता।
खुली सीमा का खतरा
पश्चिम बंगाल की भारत-बांग्लादेश सीमा लगभग 2217 किलोमीटर लंबी है। चौंकाने वाली बात यह है कि अब भी लगभग 579 किलोमीटर की सीमा बिना बाड़ के है। यह खुला हिस्सा लंबे समय से घुसपैठियों, तस्करों और अपराधी गिरोहों के लिए आसान रास्ता बना हुआ था। सुरक्षा एजेंसियां लगातार चेतावनी देती रही हैं कि खुली सीमा देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है, लेकिन राजनीतिक ढुलमुल रवैये और प्रशासनिक सुस्ती ने इस कार्य को वर्षों तक लटकाए रखा।
नई सरकार का निर्णय
नई सरकार की कैबिनेट ने लगभग 601 एकड़ भूमि सीमा सुरक्षा बल को सौंपने का निर्णय लिया है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि सीमा सुरक्षा पर अब कोई समझौता नहीं होगा। सरकार ने भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए 45 दिन की समय सीमा भी निर्धारित की है। यह निर्णय उन ताकतों के लिए एक चुनौती है, जो सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर हमेशा राजनीति करती रही हैं। सीमा पर शुरू हुई यह बाड़बंदी केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि राष्ट्र की सुरक्षा को मजबूत करने की एक निर्णायक कार्रवाई है। फांसीदेवा में शुरू हुई यह प्रक्रिया अब पूरे पश्चिम बंगाल की सीमा पर सुरक्षा की नई लकीर खींचने जा रही है।