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पश्चिम बंगाल में न्यायिक अधिकारियों का बंधक बनाना: AIMIM नेता की गिरफ्तारी

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में चुनाव ड्यूटी पर तैनात सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में AIMIM नेता मोफ़क्करुल इस्लाम की गिरफ्तारी हुई है। इस्लाम को पुलिस ने बागडोगरा हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया, जब वह राज्य से भागने की कोशिश कर रहे थे। इस घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर बंगाल सरकार की आलोचना की और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल तैनात करने का निर्देश दिया।
 

पुलिस को मिली सफलता

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में चुनाव ड्यूटी पर तैनात सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने के मामले में पुलिस ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। शुक्रवार को, पुलिस ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता मोफ़क्करुल इस्लाम को गिरफ्तार किया। अधिकारियों का कहना है कि इस्लाम उस हिंसक विरोध प्रदर्शन का 'मास्टरमाइंड' था, जिसने राज्य की कानून-व्यवस्था और न्यायपालिका की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया।


मास्टरमाइंड की पहचान

पेशे से वकील और 2021 के विधानसभा चुनावों में इटाहार से AIMIM के उम्मीदवार रहे इस्लाम को मालदा घटना का मुख्य आरोपी माना जा रहा है। उन्हें बागडोगरा हवाई अड्डे पर गिरफ्तार किया गया, जब वह राज्य से भागने की कोशिश कर रहे थे। चुनावी प्रक्रिया के तहत SIR प्रक्रिया की देखरेख कर रहे न्यायिक अधिकारियों को बुधवार को नौ घंटे से अधिक समय तक बंधक बनाया गया था। यह घटना कालियाचक II ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिस के बाहर एक बड़े विरोध प्रदर्शन के बाद हुई।


SIR प्रक्रिया का विवाद

पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न (SIR) प्रक्रिया विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ा विवाद बन गई है। इस प्रक्रिया के तहत जारी अंतिम मतदाता सूची में 63 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए थे, जबकि 60 लाख अन्य मतदाताओं को 'निर्णय के अधीन' रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, न्यायिक अधिकारियों को इन मामलों की समीक्षा करने का कार्य सौंपा गया था।


प्रदर्शनकारियों का आक्रोश

बुधवार को, प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों से मुलाकात का अनुरोध किया, जिसे ठुकरा दिया गया। इसके बाद, उन्होंने BDO कार्यालय का घेराव कर लिया और सभी सात अधिकारियों को बंधक बना लिया। अधिकारियों में से एक का पांच साल का बच्चा भी कार्यालय के अंदर मौजूद था। नौ घंटे बाद, पुलिस की एक टीम ने अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला।


सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया

यह मामला गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और अन्य न्यायाधीशों ने बंगाल सरकार की आलोचना की। कोर्ट ने इसे 'आपराधिक विफलता' करार दिया और राज्य के अधिकारियों को फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अधिकारियों को कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के दखल के बाद ही रिहा किया गया।


आगे की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल तैनात करे। इसके अलावा, कोर्ट ने मुख्य सचिव, DGP और जिला मजिस्ट्रेट को 6 अप्रैल को पेश होने के लिए भी समन जारी किया।