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पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस में असंतोष: बीजेपी सांसद का बड़ा दावा

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से हलचल देखने को मिल रही है। बीजेपी सांसद सौमित्र खान ने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस के लगभग 50 विधायक और 20 सांसद पार्टी नेतृत्व से असंतुष्ट हैं और बीजेपी में शामिल होने के लिए तैयार हैं। इस बीच, तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने इन दावों को खारिज किया है। पार्टी में बढ़ती अशांति और इस्तीफों की बाढ़ ने राजनीतिक स्थिति को और जटिल बना दिया है। क्या तृणमूल कांग्रेस इस संकट से उबर पाएगी? जानिए पूरी कहानी।
 

पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति में उथल-पुथल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर से हलचल देखने को मिल रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद सौमित्र खान ने बुधवार (27 मई 2026) को एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लगभग 50 विधायक और 20 सांसद पार्टी के नेतृत्व से असंतुष्ट हैं। खान ने यह भी कहा कि यदि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व अनुमति देता है, तो ये सभी नेता तृणमूल को छोड़कर भाजपा में शामिल होने के लिए तैयार हैं। उन्होंने चेतावनी दी, "अगर बीजेपी नेतृत्व एक बार हरी झंडी दे दे, तो टीएमसी एक राजनीतिक ताकत के रूप में समाप्त हो जाएगी। हर कोई पार्टी छोड़ने के लिए तैयार है।"


तृणमूल कांग्रेस पर हमले

सौमित्र खान ने तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर भी तीखा हमला किया, उन्हें "पापी" करार देते हुए कहा कि "पापियों को जेल जाना ही पड़ता है।" उन्होंने कहा, "आज उनके घर के सामने एक बुलडोज़र खड़ा है। 2021 में, उन्होंने BJP कार्यकर्ताओं के घरों को तुड़वा दिया था। पापियों को अपने कर्मों का फल तुरंत मिलना चाहिए।"


तृणमूल सांसद का खंडन

हालांकि, तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने खान के दावों को खारिज करते हुए कहा कि BJP नेता का बयान पूरी तरह से झूठा है। रॉय ने कहा, "यह पूरी तरह से गलत है। सौमित्र खान और BJP गलत जानकारी फैला रहे हैं। ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है।"


पार्टी में बढ़ती अशांति

सौमित्र खान की टिप्पणियां पश्चिम बंगाल में हालिया चुनावी झटके के बाद सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती अशांति के बीच आई हैं। पार्टी आंतरिक असंतोष, नगर निकायों में इस्तीफों और कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रही है।


काकोली घोष दस्तीदार का विवाद

यह विवाद तब और बढ़ गया जब बारासात की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में कई तृणमूल विधायकों के साथ हिस्सा लिया। काकोली को हाल ही में लोकसभा में तृणमूल के मुख्य सचेतक के पद से हटा दिया गया था और बाद में केंद्र द्वारा उन्हें 'Y' श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई, जिससे राजनीतिक अटकलें और तेज हो गईं।


नगर पालिकाओं में इस्तीफों की बाढ़

हाल के दिनों में विभिन्न नगर पालिकाओं के लगभग 100 पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है, जिससे उन नगर निकायों में अस्थिरता पैदा हो गई है, जिन पर अभी भी तृणमूल का नियंत्रण है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगले साल होने वाले नगर निगम चुनावों से पहले कई नगर निगम बोर्ड गिर सकते हैं।


कोलकाता के मेयर का इस्तीफा

रिपोर्ट्स के अनुसार, कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने भी पद छोड़ने की इच्छा जताई है, हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में पार्षदों से अपील की थी कि बढ़ते संकट के बीच वे इस्तीफा न दें।


भ्रष्टाचार के आरोपों से बढ़ता दबाव

शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाले BJP-शासित राज्य प्रशासन ने संकेत दिया है कि नगर निकायों की पिछली गतिविधियों की जांच की जाएगी और जहां भी अनियमितताएं पाई जाएंगी, वहां कार्रवाई की जाएगी। इस स्थिति ने राजनीतिक उथल-पुथल को और बढ़ा दिया है।


गिरफ्तारियों का असर

भ्रष्टाचार और जबरन वसूली के कथित मामलों से जुड़ी कई गिरफ्तारियों ने पार्टी के भीतर चिंता को और बढ़ा दिया है। पिछले हफ्ते, जबरन वसूली और धमकाने के आरोपों में तीन पार्षदों को गिरफ्तार किया गया था।


संजय दास की मौत से बढ़ी बेचैनी

23 मई को दक्षिण दमदम के प्रभावशाली तृणमूल पार्षद संजय दास की मौत ने भी बेचैनी बढ़ा दी। दास, जिन्हें तृणमूल नेता देबराज चक्रवर्ती का करीबी माना जाता था और जिन पर भ्रष्टाचार तथा जबरन वसूली के आरोप थे, फंदे से लटके पाए गए थे। पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया है।


नगर पालिकाओं में इस्तीफों का प्रभाव

उत्तर 24 परगना और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों की नगर पालिकाएं इस्तीफों से सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। भाटपारा नगर पालिका में, अध्यक्ष रेबा राहा सहित 35 में से 30 पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया। पड़ोसी हालीशहर नगर पालिका में, 23 में से 16 पार्षदों ने पद छोड़ दिया, जबकि कांचरापाड़ा नगर पालिका से 14 पार्षदों ने इस्तीफा दिया।


भाटपारा नगर पालिका के उपाध्यक्ष का बयान

भाटपारा नगर पालिका के उपाध्यक्ष देबज्योति घोष ने कहा कि उनके पास इस्तीफा देने के अलावा "कोई विकल्प नहीं" था; उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा है और तृणमूल नेतृत्व मार्गदर्शन या समर्थन देने में विफल रहा है।


2024 के चुनावों की तैयारी

पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों में, तृणमूल ने 29 सीटें जीतीं, जबकि BJP को 12 सीटें मिलीं और कांग्रेस ने एक सीट जीती। खान के इस दावे ने कि 20 सांसद दल-बदल करने के लिए तैयार थे, नई राजनीतिक अटकलों को जन्म दे दिया है।