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पश्चिम बंगाल में टीएमसी सांसदों की बगावत: ममता बनर्जी की चुनौतियाँ बढ़ीं

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के 19 सांसदों ने बगावत का झंडा उठाया है, जिसमें अभिनेता-राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान शामिल हैं। यह घटनाक्रम पार्टी के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकट बनता जा रहा है। सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने एक अलग गुट बनाने की योजना का उल्लेख किया है। जानें इस बगावत के पीछे की वजह और इसके संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं।
 

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक संकट


नई दिल्ली: ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में, विधायकों के बाद, 19 सांसदों ने भी बगावत का झंडा उठाया है। इस सूची में अभिनेता-राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान जैसे नाम शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र सौंपा है जिसमें उनके हस्ताक्षर हैं। हालांकि, पार्टी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


बागी सांसदों की सूची

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस घटनाक्रम ने चर्चाओं को तेज कर दिया है। तृणमूल कांग्रेस के पास लोकसभा में कुल 28 सांसद हैं। यदि बागी सांसदों के दावे सही साबित होते हैं, तो यह टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका होगा। सभी की नजरें इस बात पर हैं कि पार्टी नेतृत्व इस स्थिति पर क्या कदम उठाता है।


बागी सांसदों की सूची में शामिल हैं: काकोली घोष (बारासात), जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार), खलीलुर रहमान (जंगीपुर), यूसुफ पठान (बहरामपुर), अबू ताहिर खान (मुर्शिदाबाद), पार्थ भौमिक (बैरकपुर), बापी हलदार (मथुरापुर), सायोनी घोष (जादवपुर), माला रॉय (कोलकाता दक्षिण), मिताली बाग (आरामबाग), दीपक अधिकारी (घाटाल), कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम), जून मालिया (मेदिनीपुर), अरूप चक्रवर्ती (बांकुड़ा), डॉ. शर्मिला सरकार (वर्धमान पूर्व), शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल), असित कुमार माल (बोलपुर), शताब्दी रॉय (बीरभूम), रचना बनर्जी (हुगली)।


बागी सांसदों की रणनीति

सूत्रों के अनुसार, बागी सांसदों ने टीएमसी से इस्तीफा न देने का निर्णय लिया है और वे एक अलग गुट के रूप में काम करने की योजना बना रहे हैं। यह कदम दलबदल विरोधी कानून से बचने के लिए उठाया गया है। उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को काकोली घोष के नेतृत्व में एक अलग संसदीय गुट बनाने की सूचना दी है।


बागी गुट स्पीकर के सामने यह तर्क दे सकता है कि काकोली घोष लोकसभा में टीएमसी की चीफ व्हिप हैं, जो संसद में कानूनी लड़ाई का मुख्य मुद्दा बन सकता है।


टीएमसी के साथ रहने वाले सांसद

महुआ मोइत्रा (कृष्णानगर), सौगात रॉय (दम-दम), प्रतिमा मंडल (जयनगर), अभिषेक बनर्जी (डायमंड हार्बर), सुदीप बंदोपाध्याय (कोलकाता उत्तर), प्रसून बनर्जी (हावड़ा), सजदा अहमद (उलूबेरिया), कल्याण बनर्जी (श्रीरामपुर), कीर्ति आजाद (बर्धमान-दुर्गापुर) जैसे सांसद अब भी ममता बनर्जी के साथ हैं।


पश्चिम बंगाल विधानसभा में यह बगावत अब पार्टी के अस्तित्व और नेतृत्व की लड़ाई में बदलती नजर आ रही है।


राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा

टीएमसी की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने हाल ही में पार्टी और संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे को व्यक्तिगत और राजनीतिक कारणों से जोड़ा गया है। सूत्रों का कहना है कि वह बीजेपी में शामिल हो सकती हैं। इससे पहले, टीएमसी के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने भी इस्तीफा दिया था।


बागी खेमे का दावा

बागी खेमे के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने कहा है कि उनके गुट के साथ अब 64 विधायक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह संख्या और बढ़ सकती है। उनका कहना है कि असली तृणमूल कांग्रेस वही है, न कि ममता बनर्जी का गुट।