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पश्चिम बंगाल में टीएमसी नेता की गिरफ्तारी: जबरन वसूली के आरोप

पश्चिम बंगाल पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को जबरन वसूली के आरोप में गिरफ्तार किया है। खान, जो कई दिनों से फरार था, को भारत-नेपाल सीमा के पास पकड़ा गया। इस गिरफ्तारी के पीछे चुनाव आयोग द्वारा फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में मतदान रद्द करने का निर्णय भी है, जहां मतदाताओं को डराने-धमकाने और ईवीएम में छेड़छाड़ के मामले सामने आए थे। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके राजनीतिक प्रभाव।
 

टीएमसी नेता की गिरफ्तारी

पश्चिम बंगाल पुलिस ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता जहांगीर खान को भारत-नेपाल सीमा के निकट एक जबरन वसूली मामले में गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, खान कई दिनों से गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अंततः उसे अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास पकड़ लिया गया। यह गिरफ्तारी कई हफ्तों बाद हुई है, जब उसके खिलाफ जबरन वसूली, धमकी, मारपीट और चुनावी हिंसा जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे।


चुनाव आयोग का निर्णय

चुनाव आयोग ने फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में विधानसभा चुनाव परिणामों के दो दिन पहले दोबारा मतदान का आदेश दिया, जो कई अनियमितताओं और शिकायतों के कारण था। बंगाल की 293 सीटों के परिणाम 4 मई को घोषित किए गए, लेकिन केंद्रीय चुनाव निकाय ने "गंभीर चुनावी अपराधों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के उल्लंघन" का हवाला देते हुए फाल्टा में मतदान रद्द कर दिया। वहां मतदाताओं को डराने-धमकाने और ईवीएम में छेड़छाड़ के मामले सामने आए, जिसमें विपक्षी उम्मीदवारों के नाम मिटाने की घटनाएं भी शामिल थीं।


जहांगीर खान की गिरफ्तारी का संदर्भ

जहांगीर खान, जिन्होंने पुलिस पर्यवेक्षक अजय पाल शर्मा को चुनौती देने के लिए 'पुष्पा' उपनाम अपनाया था, को बंगाल एसटीएफ ने नेपाल सीमा के पास गिरफ्तार किया। वह हफ्तों तक फरार रहने के बाद कथित तौर पर भारत से भागने की कोशिश कर रहा था। चुनाव से पहले, खान ने शर्मा के घर जाकर उनके परिवार को मतदाताओं को डराने-धमकाने के खिलाफ चेतावनी दी थी, जिसके बाद उसने कहा था, "अगर वह सिंघम है, तो मैं पुष्पा हूं।"