पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के बाद एनडीए की नई रणनीतियाँ
कोलकाता से दिल्ली तक की हलचल
पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए चुनावों के परिणामों के बाद कोलकाता से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। तृणमूल कांग्रेस में आंतरिक मतभेदों की खबरों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक को फिर से संसद में पेश कर सकती है। इससे पहले बजट सत्र में दो-तिहाई बहुमत की कमी के कारण महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक लोकसभा में गिर गए थे।
मानसून सत्र की संभावनाएँ
जुलाई के अंत में मानसून सत्र शुरू होने की संभावना है। ध्यान रहे कि संविधान का 131वां संशोधन विधेयक, जो 2026 के बजट सत्र में पारित नहीं हो सका, का उद्देश्य 2011 की जनगणना के आधार पर चुनावी सीमाओं को पुनः निर्धारित करना था। वर्तमान में लोकसभा में एनडीए के पास बहुमत का आंकड़ा है, लेकिन यह दो-तिहाई से कम है।
टीएमसी के बागियों का समर्थन
सोमवार (09 जून) को टीएमसी की सांसद काकोली घोषण दस्तीदार ने एक बड़ा दावा किया कि उन्हें 20 टीएमसी सांसदों का समर्थन प्राप्त है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ममता बनर्जी के बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा है। हालांकि, इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यदि इनमें से 20 सांसद बागी हो जाते हैं, तो यह दल-बदल विरोधी कानून के तहत पार्टी को विभाजित करने के लिए आवश्यक संख्या से एक अधिक होगा।
बागी सांसदों का नया गुट
रिपोर्टों के अनुसार, बागी टीएमसी सांसद एक नया गुट बनाने की योजना बना रहे हैं और एनडीए सरकार को समर्थन देने की तैयारी कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है, तो लोकसभा में एनडीए की सीटों की संख्या पहली बार 300 के पार जा सकती है। 2024 के आम चुनाव में एनडीए को 293 सीटें मिली थीं।
डीएमके का सशर्त समर्थन
हाल ही में तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनाव में डीएमके को मिली हार के बाद उसकी सहयोगी कांग्रेस ने साथ छोड़ दिया। ऐसे में यह माना जा रहा है कि लोकसभा में डीएमके से सशर्त समर्थन प्राप्त करने के लिए बातचीत चल रही है। यदि यह सही साबित होता है, तो एनडीए दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुँच जाएगा।
महत्वपूर्ण विधेयकों की तैयारी
सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने की तैयारी कर रही है, जिनमें 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने के लिए आवश्यक संविधान संशोधन विधेयक और 'एक देश, एक चुनाव' जैसे बिल शामिल हैं। हालांकि, इन विधेयकों को पारित कराने के लिए एनडीए को संसद की दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।
संसद में संख्याबल का गणित
टीएमसी के बागी सांसदों का समर्थन एनडीए की योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। लोकसभा में 543 सदस्यों में से दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 362 है। वर्तमान में एनडीए के पास 293 सांसद हैं। यदि टीएमसी के बागी एनडीए का समर्थन करते हैं, तो यह संख्या 313 हो जाएगी।
अप्रैल में क्या हुआ था?
अप्रैल में 131वें संविधान संशोधन विधेयक के लिए मतदान के दौरान 528 सांसद उपस्थित थे, जिसमें 352 वोटों की आवश्यकता थी। विधेयक के पक्ष में 298 वोट मिले और इसके विरोध में 230 वोट पड़े, जिससे यह विधेयक गिर गया। अब सरकार ने इस अंतर को कम करने की कोशिश की है।