पलानी मुरुगन मंदिर भूमि विवाद में चार गिरफ्तार, जांच जारी
पलानी मुरुगन मंदिर भूमि विवाद
डिंडीगुल (तमिलनाडु), 29 जुलाई: तमिलनाडु की सीबी-सीआईडी ने पलानी मुरुगन मंदिर से संबंधित एक मठ की मूल्यवान भूमि के फर्जी विलेख तैयार करने के मामले में चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों को एक स्थानीय अदालत ने 12 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस के अनुसार, इन गिरफ्तारियों से मंदिर के पास स्थित 1.4 एकड़ भूमि के विवाद में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों की पहचान तिरुपुर के वेल्लाईथुरई (60), डिंडीगुल के अनवरदीन (65), विल्लुपुरम के मुरुगादास (56) और पलानी के सेतुपति के रूप में हुई है। इनकी पूछताछ सीबी-सीआईडी की पुलिस अधीक्षक शाजिता की निगरानी में की गई। पुलिस एक अन्य मुख्य आरोपी जयप्रकाश की तलाश कर रही है, जो ओड्डनछत्रम का निवासी है और वर्तमान में फरार है।
चारों आरोपियों को पुलिस सुरक्षा में डिंडीगुल सीबी-सीआईडी कार्यालय से अदालत ले जाया गया, जहां उन्हें 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। पलानी मंदिर भूमि विभाग के अधीक्षक मुरुगनंदम की शिकायत पर चारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
इन आरोपियों में पलानी के संयुक्त उप पंजीयक जस्टिन मणिकंडन, मंदिर न्यास के सदस्य मुरुगादास, तिरुपुर के वेल्लाईथुरई (जिन्होंने भूमि खरीदी) और पलानी पुदुर के सेतुपति शामिल हैं। उनके खिलाफ आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी सहित पांच धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह भूमि श्रद्धालुओं के लिए मुफ्त पार्किंग सेवा के लिए उपयोग की जा रही है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 100 करोड़ रुपये है।
हालांकि, इस भूमि को इस महीने की शुरुआत में केवल दो करोड़ रुपये में निजी व्यक्तियों के नाम पंजीकृत किया गया। अधिकारियों ने बताया कि 1888 के स्थायी बंदोबस्ती विलेख के अनुसार, यह भूमि केवल धार्मिक और परमार्थ कार्यों के लिए समर्पित थी, और इसे किसी भी प्रकार की व्यावसायिक बिक्री या हस्तांतरण से रोका गया था। इसके बावजूद, 6 जुलाई को इसे निजी लोगों के नाम पंजीकृत किया गया।
इस पंजीकरण के दौरान हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग की स्पष्ट आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया। राज्य सरकार ने पहले ही पलानी के संयुक्त उप पंजीयक जस्टिन मणिकंडन और जिला पंजीयक शशिकला को निलंबित कर दिया था। मणिकंडन को मद्रास उच्च न्यायालय से इस मामले में अंतरिम अग्रिम जमानत मिली है, और हाल ही में उनसे सीबी-सीआईडी ने सात घंटे तक पूछताछ की थी।
सीबी-सीआईडी को 15 जुलाई को इस मामले की जांच सौंपी गई थी, और अब तक 80 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने पहले ही विवादित बिक्री विलेख को अमान्य घोषित कर दिया है।