पटना हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: EPFO को 11 साल बाद लौटाने होंगे ब्याज सहित पैसे
कोर्ट का निर्णय
15 अप्रैल, 2026 को पटना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू और जस्टिस हरीश कुमार ने 'अनुचित लाभ' के सिद्धांत का हवाला देते हुए यह निर्णय सुनाया कि एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (EPFO) किसी असेसी द्वारा जमा की गई राशि को लगभग 11 वर्षों तक अपने पास नहीं रख सकता, विशेषकर जब PF असेसमेंट को रद्द कर दिया गया हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि EPFO ने 10 लाख रुपए की जमा राशि को अपने पास रखकर, असेसी को उसके कानूनी अधिकार से वंचित किया है। यदि EPFO ने रद्द होने के बाद यह राशि वापस कर दी होती, तो असेसी इसे निवेश कर ब्याज कमा सकता था। इस प्रकार, EPFO ने न केवल अनुचित लाभ उठाया, बल्कि अपील करने वाले को भी ब्याज कमाने के अवसर से वंचित किया। इसलिए, पटना हाई कोर्ट ने EPFO को इस राशि पर ब्याज देने का आदेश दिया।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 'कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952' के तहत एक PF असेसमेंट ऑर्डर से शुरू हुआ, जिसमें एक संगठन को 20 लाख रुपए से अधिक की राशि जमा करने का निर्देश दिया गया था। संगठन ने EPF अपीलेट ट्रिब्यूनल में इस आदेश को चुनौती दी, लेकिन उसे राशि जमा करने का निर्देश दिया गया। प्रारंभ में, संगठन यह राशि जमा नहीं कर सका, लेकिन बाद में पटना हाई कोर्ट के आदेश पर, उसने चार चालानों के माध्यम से 10,12,692 रुपए जमा कर दिए।
जब EPF अपीलेट ट्रिब्यूनल ने 2 जून, 2011 को PF असेसमेंट ऑर्डर को रद्द किया, तो मामला EPFO के पास वापस भेजा गया। हालांकि, EPFO ने इसे लगभग 11 वर्षों तक लटकाए रखा और संगठन के अनुरोधों को नजरअंदाज किया।
असेसी की अपील
25 जनवरी, 2023 को 49,453 रुपए जमा करने के बाद, असेसी ने रीजनल प्रोविडेंट फंड कमिश्नर को दो पत्र सौंपे, जिसमें उसने 10,12,692 रुपए की वापसी की मांग की। हालांकि, EPFO ने इस राशि को एक दशक से अधिक समय तक अपने पास रखा।
असेसी का कहना है कि जब प्रोविडेंट फंड कमिश्नर ने स्वीकार किया कि 49,453 रुपए की राशि जमा करने के बाद रिफंड की रिक्वेस्ट पर विचार किया जाएगा, तो यह तुरंत ब्याज के साथ किया जाना चाहिए था। लेकिन EPFO ने नई शर्तें रखीं कि रिफंड की प्रक्रिया से पहले पेनल्टी और ब्याज का हिसाब किया जाएगा।
पटना हाई कोर्ट का आदेश
EPFO के वकील ने तर्क किया कि जमा राशि पर ब्याज देने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। लेकिन पटना हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया और कहा कि 2009 में जमा की गई राशि को EPFO ने अपने पास रखा और उसका उपयोग किया।
कोर्ट ने कहा कि 'सहकारी खंड उद्योग मंडल लिमिटेड' के मामले में तय सिद्धांत इस मामले पर लागू होता है। कोर्ट ने EPFO के तर्क को खारिज करते हुए कहा कि जब 2011 में असेसमेंट ऑर्डर रद्द किया गया, तो EPFO के पास राशि को अपने पास रखने का कोई औचित्य नहीं था। अंततः, कोर्ट ने EPFO को 6% प्रति वर्ष की दर से ब्याज देने का आदेश दिया।