पटना में नीट छात्रा की मौत: परिवार ने CBI जांच की मांग की
पटना में नीट परीक्षा के दौरान छात्रा की मौत का विवाद
पटना में नीट परीक्षा के दौरान एक छात्रा के बेहोश होने के बाद उसकी मौत ने देशभर में विवाद खड़ा कर दिया है। वीडियो में दिखाया गया है कि छात्रा का पिता उसे गोद में उठाकर अस्पताल की ओर दौड़ रहा था। वह अपनी बेटी को तुरंत चिकित्सा सहायता दिलाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन समय पर इलाज न मिलने के कारण 17 वर्षीय छात्रा की जान चली गई। इस घटना के बाद पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं, जिसके चलते परिवार और छात्र संगठनों ने CBI जांच की मांग की है।
घटना का विवरण
नीट परीक्षा के दौरान पटना के अनुमंडल अस्पताल में छात्रा अचानक बेहोश हो गई। वीडियो में उसके पिता को उसे गोद में उठाकर अस्पताल के गलियारे में दौड़ते हुए देखा जा सकता है। कुछ समय बाद छात्रा की मृत्यु हो गई। परिवार का आरोप है कि अस्पताल में ऑक्सीजन, डॉक्टर और अन्य आवश्यक सुविधाएं समय पर उपलब्ध नहीं थीं।
पिता ने कहा: “मैं अपनी बेटी को बचाने के लिए दौड़ रहा था, लेकिन अस्पताल में कोई डॉक्टर नहीं था, ऑक्सीजन सिलेंडर खाली था। मेरी बेटी मेरी गोद में ही दम तोड़ गई।”
पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट के निष्कर्ष
पटना मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक विभाग की रिपोर्ट के अनुसार:
- मौत का कारण हाइपोक्सिया (शरीर में ऑक्सीजन की कमी) और कार्डियो-रेस्पिरेटरी फेल्योर बताया गया है।
- शरीर पर कोई बाहरी चोट के निशान नहीं मिले।
- रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि मौत परीक्षा केंद्र पर बेहोशी के बाद हुई और इलाज में देरी एक प्रमुख वजह रही।
- फॉरेंसिक जांच में पाया गया कि छात्रा को पानी या कोई भी दवा नहीं दी गई थी, जबकि कई अन्य छात्रों को पानी पिलाकर बेहोशी से बाहर लाया गया।
परिवार और छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया
परिवार ने आरोप लगाया कि:
- परीक्षा केंद्र पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी।
- अस्पताल में इमरजेंसी वार्ड बंद था।
- नीट परीक्षा के दौरान मेडिकल स्टाफ की कमी थी।
- छात्रा के पिता ने कहा, “अगर समय पर ऑक्सीजन मिल जाती तो मेरी बेटी आज जिंदा होती।”
छात्र संगठन और विपक्षी दल इस मामले को नीट परीक्षा की खामियों और सरकारी अस्पतालों की बदहाली से जोड़ रहे हैं।
CBI जांच की आवश्यकता
- परिवार का कहना है कि स्थानीय पुलिस जांच निष्पक्ष नहीं हो रही।
- कई वीडियो और गवाहों के बयान के बावजूद कोई बड़ा अधिकारी जिम्मेदार नहीं ठहराया गया।
- बिहार में पिछले कुछ सालों में नीट से जुड़े कई विवाद हो चुके हैं, इसलिए परिवार और छात्र संगठन CBI जांच की मांग कर रहे हैं।
- कांग्रेस, RJD और अन्य दलों ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “छात्रों की जान से खिलवाड़ हो रहा है।”
बिहार सरकार की प्रतिक्रिया
बिहार सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, नीट आयोजक NTA ने कहा कि परीक्षा केंद्र पर मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध थीं, लेकिन स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी थी।