पटना पुलिस की छापेमारी में अनुशासनहीनता का मामला, दो थानेदार निलंबित
पटना में पुलिस की छापेमारी का विवाद
पटना: छापेमारी के दौरान पटना पुलिस को खुद ही तलाशी देने की स्थिति में आना पड़ा, और वो भी कतार में खड़े होकर। एक नाबालिग जैसे दिखने वाले लड़के ने पुलिसकर्मियों की गेट पर तलाशी ली। वर्दी में सजे जवान पुलिसकर्मी अपनी कमर की तलाशी देते रहे, जबकि उनके कंधों पर एके-47 जैसी राइफलें लटक रही थीं। दो थानों की टीम एक गैंगस्टर के घर पर जांच के लिए गई थी, जिसमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं।
पुलिस की गरिमा पर सवाल
पुलिस की तलाशी के दौरान एक युवक ने कहा कि जो लोग चेक नहीं हुए हैं, वे घर के अंदर नहीं जा सकते। इस दृश्य में लगभग दो दर्जन पुलिसकर्मी सहमे हुए नजर आए। यह घटना पटना से लगभग 70-75 किलोमीटर दूर बाढ़ जिले में हुई। बिहार की सम्राट सरकार भी पटना से ही संचालित होती है, और यहां के मुख्यमंत्री, डीजीपी, एसएसपी और एसपी भी निवास करते हैं।
पुलिस की इस कार्रवाई का पूरा मामला क्या है? बाढ़ अनुमंडल के पंचमहला थाना क्षेत्र में एक अपराधी के घर छापेमारी के दौरान पुलिस का व्यवहार खाकी की गरिमा को धूमिल कर गया। एक वीडियो में पुलिसकर्मी अपराधियों के परिवार के सामने कतार में खड़े होकर अपनी तलाशी देते हुए दिखाई दिए। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्तिकेय शर्मा ने पंचमहला और हाथीदह के थाना अध्यक्षों को निलंबित कर दिया है और विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
घटनाक्रम की शुरुआत
यह घटनाक्रम 23 मई 2026 की शाम लगभग 6 बजे शुरू हुआ, जब एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दो पक्षों के बीच हिंसक झड़प हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों ओर से गोलीबारी शुरू हो गई। इस घटना के बाद पंचमहला थाने में मामला दर्ज किया गया। इसी मामले में नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित की गई थी।
पुलिस ने कुख्यात अपराधियों सोनू और मोनू के घर पर छापेमारी की, लेकिन दोनों मुख्य आरोपी फरार मिले। इस दौरान घर पर मौजूद महिलाओं और परिजनों ने पुलिस की चेकिंग की और इसका वीडियो भी बनाया।
पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
वीडियो में पुलिस की कार्यशैली ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिसने पूरे पुलिस महकमे को शर्मसार कर दिया है। थानेदार ने लाइन में लगकर अपनी तलाशी दी। एक महिला ने सोनू के भाई और कुख्यात अपराधी मोनू से थानेदार की फोन पर बात कराई। पुलिस टीम ने वहां मौजूद परिजनों के सामने कतार में खड़ी होकर चेकिंग कराई।
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि अपराधियों में कानून का डर खत्म हो गया है और पुलिस की छवि को नुकसान पहुंचा है।
पटना SSP की कार्रवाई
पटना SSP ने इस मामले को गंभीरता से लिया और दोनों थानेदारों को निलंबित कर दिया। उन्होंने कहा कि किसी वांछित अपराधी के घर पर पुलिसकर्मियों द्वारा खुद की तलाशी देना और अपराधी से फोन पर बात करना अनुशासनहीनता है। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों थानेदारों से पूरे मामले पर जवाब मांगा गया है।
वीडियो में दिख रहे दोनों थाना इंचार्ज युवा हैं। उनकी पुलिस ट्रेनिंग में अपनी रक्षा की बात बताई गई होगी, लेकिन आरोपी के दरवाजे पर कतार में लगकर तलाशी देने की बात नहीं सिखाई गई होगी। यदि उन्हें इतना डर था, तो उन्हें अपने सीनियर अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए थी।