पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र: विपक्षी दलों की तैयारी और महत्वपूर्ण मुद्दे
पंजाब विधानसभा का आगामी मानसून सत्र
चंडीगढ़, 2 अगस्त: पंजाब विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है, जिसमें हंगामे की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सहित अन्य विपक्षी दल कानून-व्यवस्था, बढ़ते कर्ज और कथित प्रश्नपत्र लीक जैसे मुद्दों पर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को घेरने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा, विधानसभा में बेअदबी रोधी कानून का मुद्दा भी उठाया जा सकता है।
यह सत्र 10 अगस्त तक चलेगा। कार्यक्रम के अनुसार, सत्र की शुरुआत दिवंगत व्यक्तियों को श्रद्धांजलि देने के साथ होगी। विधानसभा में चार, पांच, सात और 10 अगस्त को विधायी कार्य होंगे, जबकि छह अगस्त को गैर-सरकारी कार्य होंगे।
आठ और नौ अगस्त को अवकाश रहेगा। इस सत्र के दौरान, सरकार निजी स्कूलों की फीस को नियंत्रित करने के लिए पंजाब गैर-सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान शुल्क विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करेगी। पहले से ही, निजी स्कूलों की वार्षिक फीस वृद्धि की सीमा पांच प्रतिशत तय की जा चुकी है।
यदि किसी स्कूल ने पिछले तीन वर्षों में 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाई है, तो अभिभावकों को वह राशि लौटानी होगी। सरकार का कहना है कि इससे पंजाब के 7,800 से अधिक निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 32 लाख से अधिक छात्रों को लाभ होगा।
अकाल दल वारिस पंजाब दे के नेता मनप्रीत सिंह अयाली ने कहा कि वे विधानसभा में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति, प्रश्नपत्र लीक, बरनाला में सफाई कर्मचारियों पर लाठीचार्ज और सरकारी कर्मचारियों के लंबित महंगाई भत्ते जैसे मुद्दों को उठाएंगे।
अयाली ने कहा, "हम विधानसभा में राज्य से जुड़े सभी मौजूदा मुद्दों को उठाएंगे।" हाल ही में फार्मेसी अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित नकल गिरोह का खुलासा होने के बाद विपक्ष ने पिछले चार वर्षों में हुए प्रश्नपत्र लीक के मामलों को लेकर 'आप' सरकार पर लगातार हमला किया है। हालांकि, मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि उनके कार्यकाल में राज्य में एक भी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ।
विपक्ष 22 जुलाई को बरनाला में हुई घटना को लेकर भी मान सरकार को घेर रहा है, जिसमें पुलिस ने सफाई कर्मचारियों पर लाठीचार्ज किया था। आरोप है कि सफाई अभियान रोकने की कोशिश में कर्मचारियों ने पुलिस पर पथराव किया। बेअदबी रोधी कानून का मुद्दा भी विधानसभा में प्रमुखता से उठ सकता है।
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने धार्मिक ग्रंथों की बेअदबी से संबंधित कानून पर पंजाब सरकार के जवाब को 'असंतोषजनक' करार दिया और इस मुद्दे पर 'आप' सरकार से बातचीत के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने की घोषणा की।