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पंजाब की राजनीति में उथल-पुथल: AAP के सांसदों का BJP में विलय

पंजाब की राजनीति में एक अभूतपूर्व संकट उत्पन्न हुआ है, जब आम आदमी पार्टी के 7 राज्यसभा सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए दिल्ली की यात्रा की है। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। मान ने कहा कि पार्टी के सभी विधायक एकजुट हैं, जबकि सांसदों ने आरोप लगाया कि AAP अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। इस स्थिति का क्या प्रभाव पड़ेगा, जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
 

पंजाब में राजनीतिक संकट

पंजाब की राजनीतिक स्थिति में एक गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों के अचानक भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंगलवार सुबह दिल्ली की ओर प्रस्थान किया। मान दोपहर 12 बजे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करेंगे, जिसमें वे राज्य के वर्तमान संवैधानिक और राजनीतिक हालात पर चर्चा करेंगे।


मुख्यमंत्री के साथ पार्टी के विधायक भी दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं।


24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी को एक बड़ा झटका लगा, जब उसके राज्यसभा के 10 सदस्यों में से सात- राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल ने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया। इन सांसदों ने आरोप लगाया कि ‘आप’ अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। इसके बाद सभी ने भाजपा में विलय कर लिया।


इन सात सांसदों में से छह पंजाब से हैं। मान का राष्ट्रपति मुर्मू से मिलने का कार्यक्रम दोपहर 12 बजे है। दिल्ली रवाना होते समय, मान ने कहा कि ‘आप’ के सभी विधायक एकजुट हैं। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, 'बैठक के लिए केवल मुझे ही समय दिया गया है।' उन्होंने यह भी कहा, 'राष्ट्रपति संविधान की संरक्षक हैं और देश की संवैधानिक प्रमुख हैं।' इससे पहले, विधायक और मंत्री मुख्यमंत्री के आवास पर एकत्र हुए और दिल्ली के लिए रवाना हुए, उनके हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था 'पंजाब मान दे नाल' और 'पंजाब के गद्दार'।