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पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी कलह: अमरिंदर सिंह राजा वडिंग का बयान

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने सुखजिंदर सिंह रंधावा की उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें रंधावा ने समझौता करने वाले नेताओं की आवश्यकता पर सवाल उठाया। वडिंग ने कहा कि उन्हें निशाना बनाना उचित नहीं है, क्योंकि रंधावा ने उनका नाम नहीं लिया। यह विवाद पंजाब कांग्रेस में हाल ही में हुए संगठनात्मक बदलाव के बाद उभरा है। वडिंग ने अपने और रंधावा के बीच के संबंधों को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह समस्या अस्थायी है।
 

पंजाब कांग्रेस के नेताओं के बीच विवाद

पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने शनिवार को कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी को किसी समझौता करने वाले नेता की आवश्यकता नहीं है। वडिंग ने यह सवाल उठाया कि उन्हें ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है, जबकि रंधावा के बयान में उनका नाम नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों नेताओं के बीच का मतभेद अस्थायी है।


 


यह विवाद पंजाब कांग्रेस में हाल ही में हुए संगठनात्मक बदलाव के बाद की अंदरूनी कलह के बीच उभरा है, जिसमें वडिंग राज्य पार्टी प्रमुख बने रहे। वडिंग ने रंधावा के साथ अपने संबंधों को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह समस्या केवल कुछ दिनों की है। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि यदि रंधावा ने उनका नाम नहीं लिया है, तो उन पर उंगली क्यों उठाई जा रही है? उन्होंने कहा कि वे रंधावा के साथ पिछले चार से पांच वर्षों से हैं और यदि उनमें से कोई समझौता करने वाला होता, तो वे इतने लंबे समय तक साथ नहीं रहते।


 


वडिंग की यह टिप्पणी रंधावा के उन बयानों के संदर्भ में आई है, जो चंडीगढ़ में कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत के घर पर पंजाब के लिए AICC प्रभारी भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद दिए गए थे। रंधावा ने कहा था कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी को ऐसे नेताओं की आवश्यकता है जो स्पष्टता और मजबूती से अपनी बात रख सकें। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को समझौता करने वाले नेताओं की आवश्यकता नहीं है।


 


रंधावा ने पत्रकारों से कहा कि उनकी बातचीत सकारात्मक रही और उन्होंने स्वीकार किया कि कभी-कभी पार्टी को कुछ निर्णय बदलने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि नेतृत्व के लिए उनका संदेश स्पष्ट था कि वर्तमान नेतृत्व के सामने उनकी मांगें स्पष्ट हैं। वे पंजाब में कांग्रेस की सरकार चाहते हैं और कानून-व्यवस्था तथा भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को हल करना चाहते हैं। इसके लिए पार्टी में एकता आवश्यक है, लेकिन उन्हें ऐसे नेताओं की भी आवश्यकता है जो स्पष्टता और मजबूती से अपनी बात रख सकें।


 


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