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नोएडा में छात्र की मौत: प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल

नोएडा में एक छात्र की पानी में डूबने से मौत के मामले ने प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है। पहले एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के बाद, अब एमिटी विश्वविद्यालय का छात्र भी इसी प्लॉट में डूब गया। सीईओ के निर्देशों के बावजूद, सिविल विभाग ने पानी निकालने का कार्य नहीं किया। जानें इस मामले में प्रशासन की क्या कार्रवाई हुई है और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
 

नोएडा में एक और दुखद घटना

नोएडा के सेक्टर-150 में एक भूखंड के बेसमेंट में भरे पानी में गिरकर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले के बाद, शहर में एक और गंभीर घटना सामने आई है। एमिटी विश्वविद्यालय का एक छात्र पार्टी के दौरान इसी प्लॉट में डूब गया।




नोएडा प्राधिकरण को इस प्लॉट में भरे पानी की जानकारी थी। दो महीने पहले, सीईओ कृष्णा करुणेश ने सिविल विभाग को निर्देश दिए थे कि पानी को निकाला जाए, लेकिन यह कार्य केवल कागजों तक ही सीमित रहा। नतीजतन, एक और छात्र की जान चली गई।


प्रशासनिक लापरवाही

युवराज की मौत के बाद, नोएडा प्राधिकरण के ट्रैफिक सेल में तैनात वरिष्ठ प्रबंधक विश्वास त्यागी को हटाने का आदेश दिया गया था, लेकिन महाप्रबंधक ने उनकी रक्षा की। इसके बजाय, संविदा पर तैनात अवर अभियंता नवीन कुमार की सेवा समाप्त कर दी गई।


16 जनवरी को युवराज की मौत के बाद, सीईओ कृष्णा करुणेश ने सिविल विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने सिविल विभाग को निर्देश दिया कि 15 दिनों के भीतर सभी गड्ढों से पानी निकाला जाए और बैरीकेडिंग की जाए।


सीईओ के आदेशों की अनदेखी

सीईओ के आदेश के तीन महीने बीत जाने के बाद भी सिविल विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। आश्चर्य की बात यह है कि सेक्टर-150 वर्क सर्किल दस में आता है, जबकि सेक्टर-94 वर्क सर्किल नौ में है, जहां दोनों वरिष्ठ प्रबंधक बदले जा चुके हैं, फिर भी कार्य अधूरा है।


महाप्रबंधक सिविल एके अरोड़ा ने कहा कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है। सीईओ कृष्णा करुणेश ने आश्वासन दिया कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।