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नेपाल के पीएम बालेन शाह के विवादास्पद बयान पर बढ़ा विरोध

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने अपने पहले संसद भाषण में भारत के बारे में एक विवादास्पद टिप्पणी की, जिसके बाद उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। पूर्व उप प्रधानमंत्री नारायण काजी ने इस बयान को राष्ट्र विरोधी करार दिया है। इसके अलावा, 10 प्रमुख छात्र संगठनों ने भी इस बयान की निंदा करते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की है। जानें इस राजनीतिक संकट के पीछे की पूरी कहानी।
 

काठमांडू में बालेन शाह का बयान बना विवाद का कारण

काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में अपने पहले भाषण के दौरान भारत के बारे में एक टिप्पणी की, जो अब उनके लिए एक बड़ी समस्या बन गई है। इस बयान के चलते नेपाल में उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। पूर्व उप प्रधानमंत्री नारायण काजी श्रेष्ठ ‘प्रकाश’ ने इस बयान को ‘राष्ट्र विरोधी’ और ‘खतरनाक’ करार दिया है।


क्षेत्रीय अखंडता पर बालेन शाह का बयान

नारायण काजी ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह बयान उन सभी देशभक्त नेपाली नागरिकों को शर्मिंदा और आक्रोशित करता है, जो देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए खड़े हैं। उन्होंने चिंता जताई कि इस गैर-जिम्मेदार बयान ने नेपाल के लंबे अभियान को कमजोर कर दिया है, जिसके तहत नेपाल लिम्पियाधुरा, लिपुलेख, कालापानी और सुस्ता जैसे विवादित क्षेत्रों को अपने अधिकार क्षेत्र में वापस लाना चाहता है। उन्होंने बालेन शाह से संसद और जनता से माफी मांगने की अपील की है।


छात्र संगठनों का विरोध

बालेन शाह के खिलाफ अब राजनीतिक दलों के साथ-साथ छात्र संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ऑल नेपाल नेशनल फ्री स्टूडेंट्स यूनियन, अखिल (सोशलिस्ट), और अन्य प्रमुख छात्र संगठनों ने एक संयुक्त बयान जारी कर प्रधानमंत्री की टिप्पणी को ‘आत्मसमर्पणवादी’ और राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया है। इन संगठनों ने बालेन शाह से सार्वजनिक माफी की मांग की है।