नेपाल के चुनावों में बालेन शाह की ऐतिहासिक जीत, ओली को मिली करारी हार
नेपाल के आम चुनावों में बड़ा राजनीतिक बदलाव
नेपाल में हाल ही में हुए आम चुनावों ने राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाया है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के नेता और पूर्व काठमांडू मेयर बालेंद्र शाह, जिन्हें बालेन के नाम से जाना जाता है, ने शानदार जीत हासिल की है। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, जो भारत-विरोधी बयानों के लिए जाने जाते हैं, को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है।
झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र, जो ओली का पारंपरिक गढ़ माना जाता है, में बालेन शाह ने ओली को 10,000 से अधिक वोटों के अंतर से हराया। मतगणना के अनुसार, बालेन को 13,000 से अधिक वोट मिले, जबकि ओली को केवल 3,000 के आसपास वोट मिले। यह अंतर ओली के राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी हार मानी जा रही है, खासकर जब उन्होंने हाल के वर्षों में भारत के खिलाफ कई कड़े बयान दिए थे।
आरएसपी ने पूरे नेपाल में अपनी स्थिति मजबूत की है। पार्टी ने कई सीटों पर जीत हासिल की है और 100 से अधिक सीटों पर आगे चल रही है, जो स्पष्ट बहुमत की ओर इशारा कर रही है। काठमांडू में आरएसपी का प्रदर्शन विशेष रूप से प्रभावशाली रहा है—काठमांडू-1 सीट पर आरएसपी की उम्मीदवार रंजू दर्शना (न्यौपाने) ने भारी अंतर से जीत दर्ज की, जहां उन्हें 15,000 से अधिक वोट मिले।
इस जीत के बाद काठमांडू की सड़कों पर जश्न का माहौल है। आरएसपी समर्थक सड़कों पर उतरकर नाच-गाने और जुलूस निकाल रहे हैं। हालांकि, पार्टी ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए काठमांडू में बड़े विजय जुलूस पर रोक लगाई है। युवा वर्ग (Gen-Z) का समर्थन आरएसपी को मिला है, जो पिछले साल के भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों से उपजा है, जिसने ओली सरकार को गिराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
यह चुनाव नेपाल की राजनीति में एक नया अध्याय खोल सकता है, जहां 35 वर्षीय बालेन शाह अब अगले प्रधानमंत्री बनने की मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं। पारंपरिक दल जैसे सीपीएन-यूएमएल और नेपाली कांग्रेस इस चुनाव में बुरी तरह पिछड़ गए हैं। पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने अपनी सीट जीती, लेकिन आरएसपी की लहर ने सभी को पीछे छोड़ दिया।
नेपाल में हो रहे इस बदलाव का भारत के लिए भी ध्यान देने योग्य है, क्योंकि ओली के भारत-विरोधी रुख के बावजूद जनता ने बदलाव का समर्थन किया है।