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नेतन्याहू और ट्रंप के बीच तनावपूर्ण फोन कॉल का खुलासा

हाल ही में बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई एक तनावपूर्ण फोन कॉल ने उनके संबंधों में गहराई से छिपे मुद्दों को उजागर किया है। ट्रंप ने नेतन्याहू को 'पागल' कहा और बेरूत पर हमले को रोकने का आदेश दिया। इस बातचीत ने यह स्पष्ट कर दिया कि ट्रंप का समर्थन नेतन्याहू की कानूनी स्थिति से जुड़ा हुआ है। जानें इस बातचीत के पीछे की सच्चाई और इसके संभावित प्रभाव।
 

ट्रंप का Netanyahu पर गुस्सा


बेंजामिन नेतन्याहू ने पिछले दो दशकों में खुद को इजरायली मतदाताओं के लिए एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया है जो अमेरिका, विशेषकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, को संभाल सकता है। लेकिन सोमवार रात को हुई एक फोन कॉल ने इस धारणा को तोड़ दिया। Axios की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने करीबी सहयोगी को डांटा।


इस कॉल का मुख्य कारण लेबनान था। नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इसराइल कैट्ज ने बेरूत के दहीयेह क्षेत्र में हिज़्बुल्लाह के लक्ष्यों पर बमबारी की धमकी दी थी, जबकि इजराइल ने दक्षिण में अपनी जमीनी कार्रवाई को बढ़ाया। कुछ घंटे पहले, ईरान ने इजराइल के लेबनान अभियान के कारण अमेरिका के साथ अपनी वार्ताओं को छोड़ने की धमकी दी थी।


हालांकि, असली मुद्दा गहराई में है, और यह युद्ध के अंत से संबंधित है। ट्रंप ईरान युद्ध से बाहर निकलना चाहते हैं, जबकि नेतन्याहू को सुरक्षा के नाम पर युद्ध को जारी रखने की आवश्यकता है।


ट्रंप ने नेतन्याहू को "पागल" कहा और उन पर आभार की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि बेरूत पर हमला इजराइल को और अलग कर देगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि नेतन्याहू बिना उनकी मदद के जेल में होते।


ट्रंप ने बेरूत पर हमलों को रोकने का आदेश दिया, और एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि योजनाबद्ध हमले नहीं होंगे। नेतन्याहू ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनकी स्थिति अपरिवर्तित है, लेकिन उनके निजी व्यवहार में आत्मसमर्पण की झलक दिखाई दी।


इस कॉल ने यह स्पष्ट कर दिया कि ट्रंप का समर्थन नेतन्याहू की कानूनी स्थिति से जुड़ा हुआ है, जिससे यह संबंध व्यक्तिगत और लेन-देन वाला बन गया है।