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नूरजहां आम: गर्मियों की अनोखी और दुर्लभ किस्म

गर्मियों का मौसम आते ही आम की चाहत बढ़ जाती है, लेकिन नूरजहां आम एक अनोखी और दुर्लभ किस्म है। यह आम अपने विशाल आकार और अद्वितीय स्वाद के लिए जाना जाता है। मध्यप्रदेश के कट्ठीवाड़ा में उगने वाला यह आम न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी लोकप्रिय है। इसकी कीमत और मांग के चलते यह आम 'आमों की महारानी' कहलाता है। जानें इसके बारे में और भी खास बातें इस लेख में।
 

नूरजहां आम का परिचय


गर्मियों का मौसम आते ही आम का नाम सुनते ही हर किसी के मन में एक खास उत्साह जाग उठता है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, आम की चाहत भी बढ़ने लगती है। बाजार में आमतौर पर अल्फांसो, दशहरी, केसर, लंगड़ा और तोतापरी जैसे आमों की भरमार होती है, लेकिन एक विशेष किस्म है जिसे लोग कम जानते हैं। यह आम इतना बड़ा होता है कि एक ही फल से पेट भर सकता है। इस अनोखी किस्म का नाम है 'नूरजहां', जो मध्यप्रदेश के कट्ठीवाड़ा में उगता है। इसका आकार पपीते के समान है और इसका स्वाद भी अद्वितीय है।


नूरजहां आम की विशेषताएँ

कट्ठीवाड़ा में पाया जाने वाला नूरजहां आम एक दुर्लभ और शाही किस्म का फल है। इसका वजन लगभग 2.5 से 3.5 किलो तक होता है और इसकी कीमत भी काफी ऊंची होती है।


आमों की महारानी

इस आम को 'आमों की महारानी' के नाम से जाना जाता है। यह अफगानी किस्म का मूल फल है और कट्ठीवाड़ा में इसके केवल कुछ पेड़ ही हैं। इसकी उच्च मांग के कारण फल आने से पहले ही इसकी बुकिंग हो जाती है। यह आम फरवरी-मार्च में फल देना शुरू करता है और जून तक तैयार हो जाता है। इसकी कीमत 500 से 2000 रुपये प्रति आम तक हो सकती है।


बाजार में नूरजहां आम की मांग

इस आम का वजन 2.5 से 3.5 किलो और लंबाई एक फीट तक होती है, जो इसे बाजार में खास बनाता है। इसकी विशेषता के कारण लोग इसे देखने के लिए उत्सुक रहते हैं।


मध्यप्रदेश की मिट्टी का योगदान

कहा जाता है कि यह किस्म अफगानिस्तान से गुजरात होते हुए भारत आई थी, और अंततः मध्यप्रदेश की मिट्टी में इसे सही स्थान मिला। यहां की मिट्टी और जलवायु ने इसे असाधारण आकार और गुणवत्ता प्रदान की है।


अंतरराष्ट्रीय मांग

यह आम न केवल भारत में, बल्कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में भी निर्यात किया जाता है। इसका स्वाद अन्य आमों से काफी अलग और समृद्ध है।


स्वाद और मूल्य

इस आम का आकार बड़ा होने के साथ-साथ इसका रसीलापन, केसरिया स्वाद और पतला छिलका इसे खास बनाते हैं। हालांकि, क्षेत्र में इसके केवल कुछ पेड़ बचे हैं, जिससे इसका उत्पादन सीमित है और इसकी कीमत भी काफी ऊंची होती है।