नीरव मोदी ने लंदन हाई कोर्ट में प्रत्यर्पण मामले में नई याचिका दायर की
नीरव मोदी का कानूनी दांव
भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी ने भारत में प्रत्यर्पण से बचने के लिए एक बार फिर से कानूनी उपायों का सहारा लिया है। 54 वर्षीय मोदी ने लंदन के उच्च न्यायालय में अपने प्रत्यर्पण मामले को फिर से खोलने की अनुमति मांगी है। उनका मुख्य तर्क यह है कि भारत में उनके साथ "अमानवीय व्यवहार और यातना का वास्तविक खतरा" है। लंदन के रॉयल कोर्ट्स ऑफ़ जस्टिस में लॉर्ड जेरेमी स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस रॉबर्ट जे की बेंच ने इस मामले की सुनवाई पूरी कर ली है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान, नीरव मोदी उत्तरी लंदन की पेंटनविले जेल से वीडियो लिंक के माध्यम से उपस्थित हुए। न्यायमूर्ति स्टुअर्ट-स्मिथ ने कहा कि यह मामला मोदी और भारत सरकार दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और जल्द ही निर्णय सुनाएंगे।
बचाव पक्ष का तर्क
मोदी की कानूनी टीम ने दलील दी है कि यदि उनका प्रत्यर्पण होता है, तो भारतीय एजेंसियों द्वारा पूछताछ के दौरान उनके साथ अमानवीय या अपमानजनक व्यवहार किया जा सकता है। उनके वकील, एडवर्ड फिट्जगेराल्ड KC ने कहा कि यातना का वास्तविक खतरा मौजूद है और भारत सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों को "न तो पर्याप्त और न ही भरोसेमंद" बताया। बचाव पक्ष ने यह भी चिंता जताई कि मोदी को मुंबई की आर्थर रोड जेल से गुजरात स्थानांतरित किया जा सकता है, जिससे अन्य एजेंसियों द्वारा भी उनसे पूछताछ की जा सके।
संजय भंडारी केस का संदर्भ
अपनी दलीलों को मजबूत करने के लिए, मोदी के वकीलों ने संजय भंडारी के मामले का उल्लेख किया, जिन्हें हाल ही में यूके में मानवाधिकारों के आधार पर प्रत्यर्पण से मुक्त किया गया था। वकीलों ने कहा कि मोदी के मामले में भी इसी तरह की चिंताओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
UK अभियोजन पक्ष का विरोध
भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए, क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) ने इस याचिका का विरोध किया। CPS की बैरिस्टर हेलेन मैल्कम KC ने कहा कि यह याचिका देर से दायर की गई है और यह एक "गलत आधार" पर आधारित है। उन्होंने अदालत से सामान्य समझ का दृष्टिकोण अपनाने की अपील की और कहा कि भारत ने मजबूत आश्वासन दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी उल्लंघन की संभावना बहुत कम है और इससे भारत और यूके के बीच भविष्य के प्रत्यर्पण सहयोग को नुकसान हो सकता है।
भारत में ट्रायल का महत्व
यदि उच्च न्यायालय अपील को फिर से खोलने की अनुमति नहीं देता है, तो मोदी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। उन्हें मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा जा सकता है। मोदी पर लगभग 2 अरब डॉलर के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के सिलसिले में कई मामले चल रहे हैं, जिनमें CBI द्वारा धोखाधड़ी की जांच और ED द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप शामिल हैं। 2021 में, तत्कालीन UK की गृह सचिव प्रीति पटेल ने उनके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। तब से, मोदी ने UK की अदालतों में जमानत के लिए कई याचिकाएं दायर की हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली है।