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नीरजा मोदी स्कूल की मान्यता विवाद से अभिभावकों की चिंताएं बढ़ीं

नीरजा मोदी स्कूल में मान्यता विवाद ने वहां पढ़ने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। लंबे समय से इस स्कूल में पढ़ाई कर रहे बच्चों का भविष्य अब अनिश्चितता के दौर में है। अभिभावक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यदि स्कूल में कोई कमियां हैं, तो उन्हें सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए। वे चाहते हैं कि प्रशासनिक कार्रवाई में छात्रों के हित को प्राथमिकता दी जाए। जानें इस मुद्दे पर अभिभावकों और शिक्षाविदों की मांगें और समाधान की दिशा में उठाए गए कदम।
 

नीरजा मोदी स्कूल में मान्यता विवाद

जयपुर। शिप्रापथ, मानसरोवर स्थित नीरजा मोदी स्कूल से जुड़ी मान्यता संबंधी समस्याओं के कारण वहां पढ़ने वाले छात्रों और उनके माता-पिता की चिंताएं बढ़ गई हैं। लंबे समय से इस विद्यालय में अध्ययन कर रहे बच्चों का शैक्षणिक भविष्य अचानक अनिश्चितता के दौर में पहुंच गया है, जिससे उनकी पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य पर भी सवाल उठ रहे हैं।


अभिभावकों का कहना है कि नीरजा मोदी स्कूल केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं है, बल्कि यह बच्चों के लिए एक सुरक्षित, अनुशासित और परिचित शैक्षणिक वातावरण प्रदान करता है। ऐसे में, सत्र के बीच में स्कूल बदलने का निर्देश बच्चों के भावनात्मक संतुलन और शैक्षणिक निरंतरता को प्रभावित कर सकता है। कई छात्रों के लिए यह समय बोर्ड परीक्षाओं और महत्वपूर्ण शैक्षणिक चरणों का भी है।


अभिभावकों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि स्कूल में किसी प्रकार की कमियां पाई गई हैं, तो उन्हें सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए, ताकि इसका नकारात्मक प्रभाव बच्चों पर न पड़े। उनका मानना है कि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई में छात्रों के हित को प्राथमिकता मिलनी चाहिए और सुधारात्मक कदमों के साथ पढ़ाई को जारी रखने की व्यवस्था होनी चाहिए।


इस पूरे मामले में अभिभावकों और शिक्षाविदों की मांग है कि संबंधित प्राधिकरण मान्यता से जुड़े निर्णय पर पुनर्विचार करे और ऐसा संतुलित समाधान निकाले, जिससे नीरजा मोदी स्कूल में पढ़ रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो और उनका भविष्य सुरक्षित रह सके।