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नीतीश कुमार का 75वां जन्मदिन: बिहार की राजनीति में उनकी यात्रा

नीतीश कुमार, बिहार के मुख्यमंत्री, आज अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। उनकी राजनीतिक यात्रा 1970-80 के दशक से शुरू हुई और उन्होंने कई बार सत्ता में वापसी की। इस लेख में, हम उनके जीवन, परिवार और राजनीतिक सफर की महत्वपूर्ण घटनाओं पर चर्चा करेंगे। जानें कैसे नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति को आकार दिया और उनके नेतृत्व में राज्य ने कैसे विकास किया।
 

नीतीश कुमार का परिचय

बिहार की राजनीतिक परिदृश्य में नीतीश कुमार का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उन्होंने नवंबर 2025 में बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में 10वीं बार शपथ ली। आज, 01 मार्च को, नीतीश कुमार अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने कई दशकों तक बिहार की राजनीति को प्रभावित किया है। आइए, उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प जानकारियों पर नजर डालते हैं...


जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

नीतीश कुमार का जन्म 01 मार्च 1951 को हुआ था। उनके पिता, कविराज राम लखन सिंह, एक स्वतंत्रता सेनानी थे। राजनीति में आने से पहले, नीतीश कुमार एक इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे। उनकी राजनीतिक यात्रा 1970-80 के दशक में शुरू हुई थी।


राजनीतिक करियर

1994 में, नीतीश कुमार ने जॉर्ज फर्नाडीज के साथ मिलकर समता पार्टी की स्थापना की। 2003 में, समता पार्टी का जनता दल में विलय हुआ, जिसके बाद इसका नाम जनता दल (यूनाइटेड) रखा गया। नीतीश कुमार जेडीयू के प्रमुख नेता के रूप में जाने जाते हैं।


नीतीश कुमार ने 1970-80 के दशक में जनता दल के साथ काम करना शुरू किया। 1977 और 1980 के विधानसभा चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 1985 में उन्होंने पहली बार जीत हासिल की। 03 मार्च 2000 को, नीतीश कुमार पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने, लेकिन उन्हें केवल 7 दिनों में इस्तीफा देना पड़ा। यह उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत का एक महत्वपूर्ण क्षण था।


2005 में, नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव की 15 साल की सत्ता को चुनौती दी और NDA के सहयोग से सत्ता में आए। इस दौरान, उन्होंने दूसरी बार मुख्यमंत्री का पद संभाला। बिहार के विकास और सुशासन की नई उम्मीद जगी। 2010 में, नीतीश कुमार ने फिर से जीत हासिल की और 2013 में भाजपा से संबंध तोड़कर महागठबंधन में शामिल हो गए। यह उनकी राजनीतिक समझ का एक उत्कृष्ट उदाहरण था।


2015 में, नीतीश ने लालू की पार्टी RJD और कांग्रेस के साथ मिलकर महागठबंधन बनाया, जिसने उनकी राजनीतिक यात्रा को नई ऊंचाई दी। 2017 में, उन्होंने महागठबंधन छोड़कर NDA में वापसी की। यह राजनीतिक लचीलापन उनकी पहचान बन गया। 2022 में, उन्होंने फिर से महागठबंधन से अलग होकर NDA में शामिल हुए और 2024 में भी NDA का हिस्सा बने।