नीति आयोग में नए सदस्यों की नियुक्ति: डॉ. जोराम अनिया और डॉ. आर. बालसुब्रमण्यम का योगदान
नीति आयोग में ऐतिहासिक बदलाव
प्रधानमंत्री के एक महत्वपूर्ण निर्णय ने नीति आयोग में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ा है। सरकार ने इस संस्था में दो नए पूर्णकालिक सदस्यों की नियुक्ति की है। इन महत्वपूर्ण पदों पर डॉ. आर. बालसुब्रमण्यम और डॉ. जोराम अनिया को जिम्मेदारी सौंपी गई है। विशेष रूप से डॉ. जोराम अनिया का नाम इस नियुक्ति में ध्यान आकर्षित कर रहा है।
डॉ. जोराम अनिया का अद्वितीय सफर
डॉ. जोराम अनिया का नीति आयोग में पहुंचना कई मायनों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वह निशी समुदाय से पहली महिला हैं, जिन्होंने पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। इसके अलावा, वह अरुणाचल प्रदेश में हिंदी में पीएचडी करने वाली पहली महिला भी हैं। यह उनके शिक्षा के प्रति समर्पण और मेहनत को दर्शाता है। एक ऐसा राज्य, जो अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए जाना जाता है, वहां से निकलकर नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य का पद संभालना पूरे पूर्वोत्तर भारत के लिए गर्व का विषय है।
18 वर्षों का अनुभव नीति निर्माण में
नीतियों का निर्माण केवल कागजों पर नहीं होता, बल्कि इसके लिए जमीनी हकीकत को समझना आवश्यक है। डॉ. अनिया के पास शिक्षा, शोध और सार्वजनिक नीति के क्षेत्र में 18 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह एक कुशल शिक्षाविद और एसोसिएट प्रोफेसर रह चुकी हैं। इसके साथ ही, उन्होंने अरुणाचल प्रदेश निजी शैक्षिक नियामक आयोग की सदस्य के रूप में राज्य की शिक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका यह अनुभव अब देश के लिए नीतियों के निर्माण में सहायक होगा।
बीवीआर सुब्रमण्यम की नई भूमिका
बीवीआर सुब्रमण्यम अब नीति आयोग के नए CEO बन गए हैं। उन्होंने परमेश्वरन अय्यर की जगह ली है, जिन्हें वर्ल्ड बैंक में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनाया गया है। सुब्रमण्यम 1987 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और आंध्र प्रदेश से आते हैं। उन्होंने लंदन बिजनेस स्कूल से पढ़ाई की है और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पर्सनल सेक्रेटरी भी रह चुके हैं।