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नीट प्रश्नपत्र लीक पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर विवाद

नीट प्रश्नपत्र लीक मामले में 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर विवाद खड़ा हो गया है। त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) ने कम घातक हथियारों का उपयोग किया, जिससे कुछ प्रदर्शनकारी घायल हुए। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए गृह मंत्री से बयान की मांग की है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सीजेपी ने अपना आंदोलन वापस ले लिया। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और आगे की कार्रवाई के बारे में।
 

प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई

नई दिल्ली, 28 जुलाई: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक के मामले में 20 जुलाई को आयोजित 'चलो संसद' मार्च के दौरान जंतर-मंतर के पास भीड़ को नियंत्रित करने के लिए त्वरित कार्रवाई बल (आरएएफ) ने दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी की अनुमति से कई कम घातक हथियारों का उपयोग किया। अधिकारियों ने मंगलवार को इस संबंध में जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस घटना का विवरण संसद मार्ग थाने की सामान्य डायरी में 22 जुलाई को अपराह्न 1:24 बजे दर्ज किया गया था।


आरएएफ की कार्रवाई का विवरण

इस प्रविष्टि में आरएएफ के एक उप कमांडेंट द्वारा दी गई सूचना का उल्लेख है, जिसमें कहा गया कि नीली वर्दी में यह बल दिल्ली पुलिस के एक डीसीपी स्तर के अधिकारी के साथ जंतर-मंतर क्षेत्र में तैनात था। थाने के अभिलेखों के अनुसार, 20 जुलाई को डीसीपी के निर्देश पर आरएएफ ने 55 नॉन-इलेक्ट्रिकल शेल, 15 इलेक्ट्रिकल शेल और पांच आंसू गैस के गोले दागे। इसके अतिरिक्त, कम घातक दंगा-रोधी बंदूक से दो राउंड और पैलेट गन से भी दो राउंड गोलियां चलाई गईं।


पैलेट गन के उपयोग पर विवाद

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि आरएएफ की अन्य टुकड़ियों ने अन्य विरोध स्थलों पर भी पैलेट गन का इस्तेमाल किया या नहीं। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि 'शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों' के खिलाफ पैलेट गन के उपयोग के आरोप पूरी तरह से 'झूठे और भ्रामक' हैं। सीआरपीएफ और आरएएफ ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।


पैलेट गन के प्रभाव

अधिकारियों ने बताया कि पैलेट गन के एक राउंड में चार प्लास्टिक छर्रे होते हैं, जो धातु के छर्रों से भिन्न होते हैं, जो शरीर को भेद सकते हैं। इन प्लास्टिक छर्रों से अपेक्षाकृत कम नुकसान होता है।


विपक्ष की प्रतिक्रिया

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग, विशेषकर पैलेट गन के उपयोग को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेर रहा है और गृह मंत्री अमित शाह से बयान देने की मांग कर रहा है। नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित इस विरोध मार्च के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों के पैलेट लगने से गंभीर रूप से घायल होने की खबरें आई थीं।


धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद सीजेपी ने अपना लगभग एक महीने से जारी आंदोलन वापस ले लिया। इस प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस, आरएएफ और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कई जवान भी घायल हुए थे। सीआरपीएफ के महानिदेशक जी. पी. सिंह ने कहा है कि इन प्रदर्शनों के दौरान हुई कार्रवाई की समीक्षा की जा रही है।


आगे की कार्रवाई

उन्होंने कहा, 'अब जबकि आंदोलन समाप्त हो चुका है और प्रदर्शनकारी हट चुके हैं, हम हर बड़े अभियान के बाद की तरह इस कार्रवाई का भी पेशेवर ढंग से आकलन करेंगे। इसके बाद बल मुख्यालय का आधिकारिक रुख आपके सामने रखा जाएगा।' अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को सीआरपीएफ के 88वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में महानिदेशक ने बल के अधिकारियों और जवानों को आश्वस्त किया कि कर्तव्य के सद्भावनापूर्ण और ईमानदार निर्वहन के दौरान उनके द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय या की गई किसी भी कार्रवाई की पूरी जिम्मेदारी वह स्वयं लेंगे।