नारद जी की जयंती पर पत्रकारिता के मूल्यों पर चर्चा
कानपुर में देवर्षि नारद जी की जयंती पर आयोजित विशेष व्याख्यान में पत्रकारिता के मूल्यों और मीडिया की भूमिका पर गहन चर्चा की गई। प्रो. संजय द्विवेदी ने नारद जी की लोक छवि और उनके संवादों की पवित्रता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति और अन्य विद्वानों ने भी अपने विचार साझा किए। यह आयोजन पत्रकारिता के छात्रों और पेशेवरों के लिए प्रेरणादायक रहा।
May 5, 2026, 19:36 IST
कानपुर में नारद जी की जयंती पर विशेष व्याख्यान
कानपुर। भारतीय जन संचार संस्थान के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा कि नारद जी की लोक छवि उनके वास्तविक व्यक्तित्व से भिन्न है। उनकी छवि एक विवादित व्यक्ति की है, जबकि उनके संवादों में हमेशा लोकमंगल की भावना होती है। उन्होंने बताया कि नारद जी का कार्य निरर्थक नहीं होता, बल्कि वे ईश्वर के दूत के रूप में संवाद करते हैं। विश्वसनीयता, सतत प्रवास और उद्देश्य की पवित्रता पत्रकारिता के लिए आवश्यक गुण हैं।
प्रो. द्विवेदी ने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर में देवर्षि नारद जी की जयंती के अवसर पर आयोजित विशेष व्याख्यान में ऑनलाइन भाग लिया। इस कार्यक्रम का विषय था- ‘राष्ट्रवादी पत्रकारिता में स्व का बोध’, जिसमें पत्रकारिता के मूल्यों और मीडिया की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने की।
प्रो. द्विवेदी ने आगे कहा कि नारद जी सभी वर्गों से संवाद करते हैं और सभी उन पर भरोसा करते हैं। वे सलाहकार, मित्र और मार्गदर्शक हैं। उनका दार्शनिक व्यक्तित्व भी सामने आता है जब वे ईश्वर के विषय में बात करते हैं। उन्होंने कहा कि नारद जी महान ऋषि परंपरा से आते हैं, लेकिन वे कोई आश्रम या मठ नहीं बनाते। उनका हर प्रवास उद्देश्यपूर्ण होता है, और उनका संवाद लोकमंगल के लिए होता है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि नारद जी को भारतीय परंपरा में पहला पत्रकार माना जाता है, जिन्होंने हमेशा सत्य और लोकहित को प्राथमिकता दी। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा करना आज की सबसे बड़ी चुनौती है। 'स्व' का बोध राष्ट्र के विकास के लिए आवश्यक है।
विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा कि यह दिन केवल एक पौराणिक जयंती नहीं है, बल्कि पत्रकारिता के मूल्यों पर आत्ममंथन का अवसर है। महर्षि नारद जी का जीवन हमें सिखाता है कि सूचना की गति से अधिक उसकी सत्यता महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. हरिओम कुमार ने नारद संचार मॉडल की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. ओम शंकर गुप्ता ने किया, जिन्होंने कहा कि नारद जी का व्यक्तित्व मीडिया जगत के लिए एक मार्गदर्शक है। अंत में धन्यवाद ज्ञापन डॉ. योगेंद्र कुमार पांडेय ने किया। इस कार्यक्रम में कई छात्र-छात्राएं भी ऑनलाइन जुड़े।