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नागालैंड में वनों की कटाई से असम में बाढ़ की समस्या बढ़ी

हाल की बाढ़ों ने असम के जोरहाट, शिवसागर और चराईदेव जिलों को प्रभावित किया है, जिसका मुख्य कारण नागालैंड में वनों की कटाई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक वर्षा और मिट्टी के कटाव ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस लेख में बाढ़ के कारण, इसके प्रभाव और संभावित दीर्घकालिक समाधानों पर चर्चा की गई है। जानें कैसे सरकार और स्थानीय प्राधिकरण इस समस्या का समाधान कर सकते हैं।
 

बाढ़ का मुख्य कारण

उच्च असम में बाढ़। (फोटो: पीटीआई)


गुवाहाटी, 31 जुलाई: नागालैंड के ऊपरी क्षेत्रों में वनस्पति की कमी हाल की विनाशकारी बाढ़ों का मुख्य कारण है, जिसने जोरहाट, शिवसागर और चराईदेव जिलों को प्रभावित किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध नदी विशेषज्ञ, प्रोफेसर नयन शर्मा के अनुसार, अत्यधिक वर्षा के कारण उत्पन्न जल प्रवाह ने मिट्टी के साथ मिलकर बाढ़ का कारण बना।


जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

प्रोफेसर शर्मा ने बताया कि 18 से 20 जुलाई के बीच मोन जिले में 239 मिमी वर्षा हुई, जिससे बाढ़ का एक बड़ा हाइड्रोग्राफ उत्पन्न हुआ। उन्होंने कहा कि 2013 से 2023 के बीच नागालैंड में लगभग 800 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र का नुकसान हुआ है, और यह आंकड़ा अब और बढ़ सकता है। इस वनस्पति की कमी ने सतही जल प्रवाह और मिट्टी के कटाव को 1.5 से 2 गुना बढ़ा दिया है।


सुरक्षा उपायों की आवश्यकता

प्रोफेसर शर्मा ने कहा कि बाढ़ के दौरान जल का प्रवाह इतना तेज था कि लोग सुरक्षित स्थानों पर नहीं जा सके। अब जब मिट्टी ने घरों और खेतों को ढक लिया है, तो प्रभावित लोगों की पुनर्वास प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण होगी।


उन्होंने यह भी बताया कि उपग्रह आधारित डेटा का उपयोग बाढ़ की भविष्यवाणी के लिए किया जा सकता है, लेकिन स्थानीय आपदा प्रबंधन सेल अभी भी मैनुअल चैनलों पर निर्भर हैं।


दीर्घकालिक समाधान

प्रोफेसर शर्मा ने सुझाव दिया कि सरकार को मध्यम आकार के बहुउद्देशीय बांधों का निर्माण करना चाहिए, जो बाढ़ के पानी को रोकने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा जल विद्युत बांधों को भी बहुउद्देशीय बांधों में परिवर्तित किया जा सकता है।